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तीन विधानसभा क्षेत्रों पिछोर, करैरा और कोलारस में कांग्रेस उम्मीदवार तय!

तीन विधानसभा क्षेत्रों पिछोर, करैरा और कोलारस में कांग्रेस उम्मीदवार तय!

पोहरी में टिकट के लिए जबरदस्त घमासान, शिवपुरी में पार्टी पशोपेश में 

शिवपुरी। प्रदेश कांग्रेस से मिल रही खबरों के अनुसार कांग्रेस ने 14 विधानसभा क्षेत्र से अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें 2013 के चुनाव में जीते ऐसे 14 विधायकों के टिकट यथावत रखे गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें शिवपुरी जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से तीन विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस विधायक शामिल हैं। सूत्रों की यदि माने तो पिछोर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार से जीत रहे केपी सिंह की उम्मीदवारी निश्चित है। करैरा से श्रीमति शकुंतला खटीक और कोलारस से विधायक महेंद्र यादव पुन: 2018 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे। जबकि पोहरी में कांग्रेस टिकट के लिए जबरदस्त घमासान है। जबकि शिवपुरी में कांग्रेस स्वंय पशोपेश में है कि भाजपा की मजबूत उम्मीदवार यशोधरा राजे सिंधिया के मुकाबले वह किसे टिकट दे। 
पिछोर कांग्रेस विधायक केपी सिंह का गढ़ माना जाता है। इस विधानसभा क्षेत्र में केपी सिंह अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के कारण चुनाव जीतते हैं। उनकी जीत में कांग्रेस का योगदान नगण्य है। यहां से 1993 से केपी सिंह की जीत उनकी निजी जीत है। इस विधानसभा क्षेत्र से वह पूर्व राजस्व मंत्री लक्ष्मीनारायण गुप्ता से लेकर भाजपा के एक से एक धुरंदरों को धूल चटा चुके हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती के भाई स्व. स्वामी प्रसाद लोधी भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इस विधानसभा क्षेत्र मेें जातीय समीकरण केपी सिंह के पक्ष में कतई नहीं है। पिछोर में मुश्किल से 5 से 10 हजार ठाकुर मतदाता हैं। जबकि यहां लोधी मतदाताओं का बाहुल्य है। लेकिन मजबूत से मजबूत लोधी उम्मीदवार भी उनसे जीत नहीं सका है। उनसे हारने वाले लोधी उम्मीदवारों में स्व. स्वामीप्रसाद लोधी के अलावा पूर्व मंत्री भैया साहब लोधी और प्रीतम लोधी भी शामिल हैं। भैया साहब 80 से 90 तक लगातार दो बार पिछोर से चुनाव जीते हैं और वह तत्कालीन अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री भी रहे हैं। पिछोर में कम से कम 50 हजार लोधी मतदाता हैं। इसके बाद भी केपी सिंह की जीत का राज यह है कि वह लोधी जाति के विरूद्ध अन्य सब जातियों को अपने पक्ष में एकजुट करते रहे हैं। 1993 से अब तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में केपी सिंह को सबसे ज्यादा चुनौती पिछले चुनाव में बाहरी उम्मीदवार प्रीतम लोधी से मिली और हर चुनाव में 18 से 20 हजार मतों से जीतने वाले केपी सिंह उस चुनाव में महज साढ़े 6 हजार मतों से ही चुनाव जीत पाए थे। जबकि भाजपा ने 2013 में पिछोर से हारी हुई लड़ाई लड़ी थी। लेकिन पिछला ट्रेक रिकॉर्ड देखते हुए कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट फाइनल कर दिया है। हालांकि कांग्रेस की गुटबाजी में केपी सिंह सिंधिया समर्थक नहीं है और वह दिग्विजय सिंह खैमे से जुडे हुए हैं। करैरा विधानसभा क्षेत्र में सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने 2013 मेंं जीती शकुंतला खटीक को टिकट देना ही तय किया है। शकुंतला खटीक सिंधिया खैमे की हैं और 2013 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव करैरा से लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने भाजपा के पूर्व विधायक ओमप्रकाश खटीक को 12 हजार मतों से हराया था। भाजपा ने उस चुनाव में अपने निवर्तमान विधायक रमेश खटीक जिन्होंने 2008 के चुनाव में 12 हजार मतों से जीत पाई थी, उनका टिकट काटकर ओमप्रकाश को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन भाजपा का यह दांव सीधा नहीं पड़ा। 2018 के विधानसभा चुनाव में सर्वे रिपोर्ट शकुंतला खटीक के खिलाफ हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि सिंधिया की पसंद और 2013 के चुनाव परिणाम के आधार पर कांग्रेस ने उन्हें टिकट देने का तय किया है। वशर्ते कि बसपा के  साथ गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में न चली जाए। सूत्र यह भी बताते हैं कि कांग्रेस कोलारस विधानसभा चुनाव में तीन माह पहले उपचुनाव में जीते महेंद्र यादव को भी टिकट देने जा रही है। 2013 में महेंद्र यादव के पिता स्व. रामसिंह यादव 25 हजार मतों से चुनाव जीते थे लेकिन उनकी मौत के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र यादव की जीत का अंतर घटकर महज 8 हजार मतों का रह गया था। हार के बावजूद भाजपा इस विधानसभा क्षेत्र में पूरा जोर लगा रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं कोलारस पर नजर रख रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट भी महेंद्र यादव के पक्ष मे नहीं है लेकिन कांग्रेस को उनका टिकट काटने का कोई बहाना नहीं मिल रहा है। जबकि श्री यादव की दावेदारी के पीछे तर्क है कि तीन माह पहले ही वह 8 हजार मतों से चुनाव जीते और उनका टिकट किस आधार पर काट दिया जाए। जबकि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में दो वैश्य उम्मीदवार राकेश गुप्ता और सिद्धार्थ लड़ा की सशक्त दावेदारी के बीच कांग्रेस पशोपेश में है कि यशोधरा राजे की मजबूत दावेदारी का मुकाबला करने के लिए वह किसे उम्मीदवार बनाए। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में अवश्य कांग्रेस टिकट के लिए जबरदस्त खीचतान है। यह विरोध इस हद तक है कि यदि एक उम्मीदवार को पार्टी टिकट देगी तो उसके विरोधी कांग्रेस को हराने में जुट जाएंगे। इस विधानसभा क्षेत्र में 2013 के चुनाव में कांग्रेस टिकट पर लड़े पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला, सुरेश राठखेड़ा, विनोद धाकड़, एनपी शर्मा, राजेंद्र पिपलौदा, विजय शर्मा, आलोक शुक्ला के अलावा शिवपुरी के पूर्व विधायक गणेश गौतम भी उम्मीदवार हैं। 
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