सिंधिया समर्थकों को अभी भी ज्योतिरादित्य के सीएम केंडिडेट घोषित होने की उम्मीद
शिवपुरी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और 9 बार के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ
को जब पार्टी आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किया तो सिंधिया समर्थक सन्निपात की स्थिति में पहुंच गए। हालांकि सिंधिया को पार्टी ने चुनाव अभियान समिति का प्रमुख घोषित किया था। लेकिन यह घोषणा भी सिंधिया समर्थकों में उत्साह का संचार नहीं कर पाई। यहीं माना गया कि सीएम केंडिडेट घोषित न होने से कमलनाथ ही 2018 के चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस का चेहरा है। शिवपुरी के एक वरिष्ठ सिंधिया समर्थक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर उग्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले तीन-चार साल से मुख्यमंत्री के खिलाफ कांगे्रस में कोई नहीं सिर्फ सिंधिया लड़ाई लड़ रही थी लेकिन उनकी ताजपोशी करने के स्थान पर कांग्रेस ने कमलनाथ को मुकुट पहना दिया। यहीं कारण रहा कि दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की जनाक्रोश रैली में शिवपुरी के प्रमुख सिंधिया समर्थक नेता और कार्यकर्ता शामिल नहीं हुए। मुश्किल से दो गाडियां शिवपुरी से गई, लेकिन अब एक-दो दिन से सिंधिया समर्थक उत्साहित दिखाई देने लगे है।
कांग्रेस में यह पुष्ट, अपुष्ट चर्चा चलने लगी है कि अभी कांग्रेस ने गुटबाजी के भय से सीएम केंडिडेट घोषित नहीं किया है। इसलिए मुख्यमंत्री प्रत्याशी की लड़ाई अभी खुली हुई है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और चुनाव अभियान समिति का प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाए जाने से यह लड़ाई अब दोनों के बीच सीमित हो गई है। पार्टी अगले तीन-चार माह दोनों नेताओं का परर्फोमेनस देखेगी और जनता के बीच किसकी पकड़ है इसका आंकलन करेगी तथा पंजाब की तर्ज पर चुनाव के दो माह पूर्व मुख्यमंत्री प्रत्याशी का ऐलान किया जाएगा। सिंधिया समर्थकों को भरोसा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की जनता के बीच अच्छी छवि के कारण उन्हें ही मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाया जाएगा। सवाल यह है कि सीएम केंडिडेट की घोषणा अभी क्यो नहीं की गई इस पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है और विभिन्न गुट एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सूहाते। ऐसी स्थिति में यदि सीएम केंडिडेट की घोषणा कर दी जाती है तो अन्य गुट उन्हें हराने के लिए एकजुट हो जाएंगे। इसलिए समय का इंतजार किया जा रहा है। पता नहीं यह बात सही है अथवा नहीं लेकिन सिंधिया समर्थकों को इससे आस अवश्य बंधी है। यहीं कारण है कि 1 मई को कमलनाथ के प्रदेशाध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने के अवसर पर सिंधिया समर्थकों को भोपाल आने का निर्देश दिए गए।
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