

फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट सहित डॉग स्क्वॉड पहुंची मौके पर, छानबीन जारी
शिवपुरी। खनियांधाना के राजमहल में स्थित 300 वर्ष पुराने ऐतिहासिक महत्व के रामजानकी मंदिर की गुम्बद पर लगे 55 किलो बजनी सोने के कलश को रात्रि में कोई अज्ञात चोर चुराकर ले गया। चोरी का पता आज सुबह तब लगा जब गुम्बद पर से कलश गायब दिखा। इससे खनियांधाना कस्बे में सनसनी फैल गई और लोग विरोध में सड़कों पर आ गए। विरोध स्वरूप खनियांधाना का पूरा बाजार बंद कर दिया गया और लोगों ने चोरों की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस और प्रशासन को उग्र आंदोलन करने की चेतावनी जारी कर दी। मौके पर पिछोर एसडीओपी आरपी मिश्रा और खनियांधाना थाने का पुलिस बल पहुंंच गया। साथ ही शिवपुरी डॉग स्क्वॉड और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट भी मौके पर पहुंच गए जहां उन्होंने छानबीन शुरू की, लेकिन चोरों का कोई सुराग नहीं लगा। चोरी हुए कलश की कीमत 15 करोड़ रूपये बताई जा रही है इतनी बड़ी चोरी के बाद पुलिस भी सकते में आ गई और मामले में तुरंत ही प्रकरण कायम कर लिया है। उक्त मंदिर की स्थापना स्टेट काल में की गई थी और महाराज सिंह जूदेव का यह पुस्तैनी मंदिर है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
आज सुबह कस्बे में उस समय सनसनी फैल गई जब राजमहल में रहने वाले शैलेन्द्र सिंह जूदेव ने मंदिर की शिखर पर स्थापित सोने के कलश को गायब देखा। शैलेन्द्र सिंह जूदेव खनियांधाना नगर पंचायत के अध्यक्ष हैं और जो खनियांधाना राज परिवार के सदस्य हैं तथा किले के एक भाग में वह रहते हैं और दूसरे भाग में मंदिर है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है। जैसे ही कलश चोरी होने की सूचना खनियांधाना कस्बे में फैली वैसे ही लोगों का जमावड़ा लग गया और देखते ही देखते वहां पुलिस बल तैनात हो गया। चूंकि मंदिर ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ धार्मिक महत्व से भी जुड़ा हुआ है जिससे भक्तों में चोरी की घटना से आक्रोश उत्पन्न हो गया और लोगों ने विरोध स्वरूप बाजार बंद कर प्रदर्शन शुरू कर दिया जिस पर पुलिस ने लोगों को समझाया और शांत रहने के लिए कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द वह चोरों को पकड़ लेंगे जिस पर लोगों का आक्रोश शांत हुआ, लेकिन लोगों को पुलिस को चेतावनी दी कि अगर जल्द ही चोर नहीं पकड़े गए तो वह उग्र आंदोलन करेंगे।
दो माह पूर्व मंदिर का हुआ था जीर्णोद्धार
रामजानकी मंदिर का पूर्व जीर्णोद्धार कराया गया था और मंदिर में काम करने के लिए महाराष्ट्र के नांदेड़ से मजदूरों को बुलाया गया था। इस बात की जानकारी जब पुलिस को लगी तो पुलिस ने अपनी टीम महाराष्ट्र के लिए रवाना कर दी। पुलिस ने उन मजदूरों के नाम भी राजमहल से लिए हैं और पुलिस उन मजदूरों से नांदेड़ पहुंचकर पूछताछ करेगी।
1983 और 2006 में भी मंदिर में हुआ था चोरी का प्रयास
वर्ष 1983 और 2006 में भी चोरों ने मंदिर के कलश को चुराने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय चोर चोरी में सफल नहीं हुए थे। 1983 में चोरी के दौरान पुलिस ने चोरों की एक गैंग को भी चोरी करते हुए मंदिर से पकड़ लिया था वहीं वर्ष 2006 में कुछ अज्ञात चोर मंदिर की गुम्बद पर चढ़ गए थे, लेकिन उस समय रस्सी और गैती सहित चोरी में प्रयुक्त अन्य सामान छोड़कर भाग गए थे।
मंदिर की सुरक्षा के लिए नहीं लगे थे सीसीटीव्ही कैमरे
पुलिस का कहना है कि मंदिर के संरक्षक शैलेन्द्र सिंह जूदेव के अनुसार कलश का बजन 55 किलो बताया गया है। अगर इतना कीमती कलश वहां लगाया गया है तो उसकी सुरक्षा के लिए सुरक्षागार्ड और सीसीटीव्ही कैमरे लगाए जाने थे, लेकिन सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक चोरी का कारण बन गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वह जल्द ही मामले का खुलासा कर देंगे और चोर उनके कब्जे में होंगे।
ओरछा के रामराजा मंदिर और रामजानकी मंदिर पर एक साथ चढ़ाए गए थे कलश
मंदिर के संरक्षक शैलेन्द्र सिंह पुत्र भानुप्रताप सिंह का कहना है कि राजमहल का रामजानकी मंदिर ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है और वह उनके पूर्वजों की आराधना स्थली रही है। 300 वर्ष पूर्व जब मंदिर का निर्माण कराया गया था तब ओरछा धाम के रामराजा मंदिर और खनियांधाना के रामजानकी मंदिर के कलश का निर्माण कराया गया था और दोनों मंदिरों की गुम्बद पर एक साथ कलश चढ़ाए गए थे।
पत्थरों के कंगूरों की सहायता से गुम्बद तक पहुंचे थे चोर
रामजानकी मंदिर से सोने का कलश चुराने की घटना ने पुलिस को सोचने के लिए मजबूर कर दिया और पुलिस हर उस बिन्दु पर जांच कर रही है जिससे वह चोरों तक पहुंच सके। पुलिस का कहना है कि मंदिर पुराने समय का बना हुआ है और वहां ऐसा कोई भी साधन नहीं मिला है जिससे चोर मंदिर की गुम्बद तक नहीं पहुंच सके। हालांकि मंदिर के गुम्बद में झण्डे लगाने के लिए पत्थर के जो कंगूरे बने हुए हैं और संभवत: चोरों ने उक्त कंगूरों को ही गुम्बद तक पहुंचने का साधन बना लिया हो।
इनका कहना है
मंदिर में चोरी की सूचना उन्हें आज सुबह जैसे ही मिली तो वह मौके पर पहुंच गए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कलश का बजन कितना है, लेकिन मंदिर के संरक्षक द्वारा जो बजन बताया गया है उसी के आधार पर उसकी कीमत आंकी गई है। संरक्षक के अनुसार कलश का बजन सवा मन है इसलिए कीमत भी करोड़ों में है। हालांकि मामले में कायमी कर ली गई और जल्द ही मामले का खुलासा भी हो जाएगा।
आरपी मिश्रा एसडीओपी पिछोर







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