Press "Enter" to skip to content

महीने पन्द्रह दिन में अपनों को भोजन कराओ तो नहीं बढ़ेंगी दूरियां : मनीषी

शिवपुरी। जैनाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के सुशिष्य मुनि प्रभाव सागर ने छत्री मंदिर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पारिवारिक रिश्ते इसलिए टूट रहे हैं, क्योंकि हमने संवाद के पुल को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही दूर रहो या पास, लेकिन दिल की नजदीकी बराबर रहना चाहिए और इसके लिए आवश्यक है कि परिवार के लोग अलग-अलग आशियाने में रहे, परंतु महीने पन्द्रह दिन में एक दूसरे को भोजन के लिए अवश्य बुलाएं। इससे दूरियां नजदीकियों में बदलेंगी। 
मुनिश्री ने कहा कि पहले परिवार भरा पूरा रहता था। एक परिवार में माता पिता के साथ दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ, ताऊ, भतीजे रहते थे। पारिवारिक एकता की मिसाल के कारण तब संस्कार देने की इतनी जरूरत नहीं पड़ती थी, क्योंकि छोटे बड़ों से सीखते थे। रिश्ते निभाने की कला जानते थे। घर में एक दूसरे को अपनत्व और आदर देखकर बच्चे सीख जाते थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। हम दो और हमारे दो के रिश्ते में परिवार सीमित हो गया है। न तो माता पिता की चिंता है और न ही अन्य रिश्तों की। भाई-भाई से अलग है, माता पिता से बेटे अलग हैं। ऐसे में रिश्तों को कायम करने के लिए अपनों को भोजन कराना सबसे बड़ा मूलमंत्र है। इससे पकवान के मीठेपन से रिश्तों में मिठास आएगी। धर्मसभा के प्रारंभ में मंगलाचरण रामदयाल जैन मावा वाले ने किया। संचालन पं. सुगनचंद्र ने किया जबकि विनयांजलि राजकुमार जैन जड़ीबूटी वालों ने दी। 
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!