भोपाल। बच्चे कई तरह के डर के चलते स्कूल नहीं जाते..
उन्हें डांट, फटकार, सजा का डर रहता है.. पढ़ाई के डर से भी वे स्कूल जाने
से कतराते हैं। ये लगभग हर स्कूल में होता है। लेकिन ऐसे स्कूलों के लिए
भोपाल के बरखेड़ी का एक स्कूल सीख बन सकता है। इस स्कूल में ना तो बच्चों
को डांट पड़ती है और ना ही फटकार। ना यूनिफॉर्म का तनाव है और ना ही
होमवर्क का।
ये स्कूल है पाथ फाइंडर एंड लर्निंग सेंटर। बरखेड़ी में
ये स्कूल आकार ले रहा है और इसमें आसपास की बस्तियों के 100 से ज्यादा
बच्चे मुफ्त में शिक्षा ले रहे हैं। बच्चे यहां बढ़-चढ़कर आते हैं क्योंकि
उन्हें यहां देर से आने पर, होमवर्क ना करने पर, यूनिफॉर्म में गड़बड़ी
होने पर सजा सजा का डर नहीं है।
एक एनजीओ के संचालक डॉ. उमेश दीक्षित
ने इस अनूठे स्कूल की परिकल्पना की। लोगों के सहयोग से ही संसाधन जुटाकर
ये स्कूल शुरु किया गया और स्कूल पूरी तरह से गरीब बच्चों के लिए काम कर
रहा है। स्कूल के कॉन्सेप्ट के पीछे संस्थापकों का यही विचार है कि ज्यादा
से ज्यादा बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाए। यदि उन्हें किसी भी प्रकार का
डर रहेगा तो वो स्कूल नहीं आएंगे। लिहाजा स्कूल में किसी प्रकार की सजा
नहीं दी जाती और इस बात का सबसे ज्यादा ख्याल रखा जाता है।
स्कूल में
आसपास की गरीब बस्तियों के 100 से ज्यादा बच्चे आते हैं। पढ़ाई-लिखाई के
अलावा कॉपी-किताबों और लाने-ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन ही उठाता
है। सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक लगने वाले इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के
लिए पूरा माहौल दिया जाता है। उच्च शिक्षित टीचर उन्हें पढ़ाते हैं और इस
दौरान इस बात का ख्याल रखा जाता है कि बच्चों को वो समझ में आ रहा है या
नहीं। स्कूल 8वीं तक है और यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ ही कॉन्वेंट
स्कूलों की तरह कम्प्यूटर और स्पोर्ट्स की गतिविधियां भी कराई जाती हैं।
दरअसल
डॉ. दीक्षित शुरु से ही समाज सेवा से जुड़े हुए हैं और बच्चों के प्रति
विशेष लगाव रखते हैं। वे पहले भी कई बार गरीब बच्चों को स्कूल की फीस अपनी
तरफ से देते रहे हैं और ये सिलसिला सालों से चल रहा है। करीब 40 अनाथ
बच्चों का पालन-पोषण भी वे पहले से ही कर रहे हैं। उनकी मदद से पढ़े कई
बच्चे इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मैनेजमेंट फील्ड में नौकरियां कर
रहे हैं। ऐसे में डॉ. दीक्षित की पहल रंग लाती नजर आ रही है।
फिलहाल
वे इस स्कूल पर ध्यान दे रहे हैं और इसकी सफलता के बाद वे अन्य स्थानों पर
भी इसी कॉन्सेप्ट के साथ स्कूल शुरु करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
ऐसा स्कूल जहां लेट आने पर नहीं पड़ती डांट, न होमवर्क करने पर न ड्रेस को लेकर
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