लाड़कुई ग्राम गुलरपुरा। बालाजी धाम गुलरपुरा में यज्ञ एवं मेला का हुआ समापन। गुलरपुरा में बसा हनुमान जी का यह मंदिर लगभग की भक्ति आराधना का क्रम बंजारो के जमाने से किया जा रहा है। यहॉ मर्यादा में रहकर अपना जीवन जीने का संदेश दिया। कथा के समापन दिवस पर आस्था और विश्वास का मानो नजर आया। सुबह लगभग 10 बजे से ही भंडारा शुरू हो गया थाए जो देर शाम तक चला। इसमें लगभग हजार श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
क्विंटलों में बना भोजन
पूर्णाहुति के भंडारे की रसोई की तैयारियां एक दिन पहले से ही शुरू हो गई थी। इसमें सैकडों कार्यकर्ता और रसोइए लगे थे। क्विंटलों से अनाज का उपयोग हुआ। भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं के कारण यहां भी पंडाल बौना साबित हुआ। आलम ये था कि स्थल और उसके आसपास लगे पंडालों का सहारा लेना पड़ा। भोजन के साथ एक स्टॉल पर पोहे का नाश्ता भी सुबह 8 बजे से शुरू हो गया थाए जो दोपहर करीब 12 बजे तक चलता रहा। भोजन प्रसादी का इंतजार करने वाले पोहे के स्टॉल पर भीड़ के रूप में नजर आए।
भंडारे की महाप्रसादी नुगदी का वितरण ट्रॉलियों में भरकर किया गया। आने.जाने वाले हर रास्ते पर सत्संग समिति के पदाधिकारियों और समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम ने ट्रॉलियां लगाकर प्रसादी वितरण किया। इससे 30 क्विंटल से भी अधिक नुगदी के वितरण का अंदाजा लगाया गया।
रास्ते पड़ गए संकरे
नगर में इतनी ज्यादा भीड़ उमड़ी कि रास्ते भी छोटे पड़ गए। हर रास्ते केवल थास्थल की ओर जाते नजर आएए जहां भीड़ ही भीड़ थी और लोग चलने के बजाय सरक रहे थे। स्थल तक जल्दी से जल्दी पहुंचने की मानो होड़ लगी हुई थी। इस भागमभाग में सारे रास्ते जाम हो गए। लगभग एक किमी क्षेत्र में चारों ओर लोगों का आना.जाना ही लगा रहा। इस लघु कुंभ में जब जनसैलाब उमड़ा तो ऐसा लगा मानो पेटलावद की पूरी आस्था यहीं जुटी है और जो असमय दिवंगत हुए हैंए उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए एक साथ प्रार्थना हो रही है। प्रार्थना के स्वर इतने बुलंद थे कि भगवान तक आवाज पहुंची हो।
दूर-दूर से आए श्रद्धालु
पूर्णाहुति का लाभ लेने के लिए अंचल के सुदूर हिस्सों से भी श्रद्धालु अन्य जगहों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में आए और पूर्णाहुति का लाभ लेने के बालाजी धाम गुलरपुरा पहुंचे। उन्होंने भी कर स्वयं को धन्य माना तथा इस सफल अनुष्ठान के लिए आयोजकों को साधुवाद देते हुए इसे विशुद्ध रूप से धार्मिक आयोजन निरूपित किया।






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