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जो कर्मचारी ATM में जमा करता था पैसा, उसी ने 21 लाख निकालकर गर्लफ्रेंड को दे दिए ! Indore News

जो कर्मचारी ATM में जमा करता था पैसा, उसी ने की 21 लाख निकालकर गर्लफ्रेंड को दे दिए
इंदौर। परदेशीपुरा थाना क्षेत्र के आईटीआई चौराहे पर लगे एसबीआई के एटीएम से 21 लाख रुपए चोरी होने के मामले में निजी कंपनी के कर्मचारियों ने अपना अपराध कबूल लिया है। चोरी करने के बाद एक कर्मचारी ने रुपए अपनी प्रेमिका को देकर शहर से बाहर भगा दिया। दोनों ने तीन महीने में शहर के अलग-अलग एटीएम से रुपए चुराना कबूला है। वे शौक पूरा करने के लिए रुपए चुराते थे। ब्याज पर रुपए का लेनदेन करते थे। हेराफेरी कर एक एटीएम का पैसा दूसरे में जमा कर देते थे। ऑडिट नहीं होने की वजह से बदमाशों की चोरी सामने नहीं आ पाई।
एएसपी प्रशांत चौबे ने बताया कि एटीएम में पैसा जमा करने वाले कर्मचारी अंकित सोलंकी और विजय जिनवाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पूछताछ में पता चला है कि दोनों ने 4 जून को रुपए जमा करने के बजाय चुरा लिए थे। एटीएम में पहले से रुपए होने की वजह से बैंक अधिकारी सहित अन्य एजेंसी को चोरी का पता नहीं चल पाया। दोनों बदमाशों ने साजिश के तहत मशीन में खराबी बताई थी। रुपए चुराने के बाद विजय ने गुना निवासी अपनी प्रेमिका को लाखों रुपए दे दिए थे। पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले उसने प्रेमिका को फोन लगाकर शहर से भगा दिया। पुलिस ने उसकी प्रेमिका से संपर्क किया है। वह बुधवार को थाने पर बयान देने आएगी। आपराधिक भूमिका पाए जाने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उधऱ, दोनों आरोपितों ने कबूला है कि चोरी करने के बाद कुछ रुपए उन्होंने ब्याज पर दे दिए। वहीं ब्याज पर उधार लिए रुपए चुका दिए। दोनों के नाम पर चल रहे लोन की राशि भी जमा की है। इस तरह करीब आठ लाख रुपए वे खर्च कर चुके हैं। वे अपनी अय्याशी पूरी करने के लिए एटीएम से रुपए चुराते थे।
एक से निकाल दूसरे एटीएम में कर देते थे जमा
दोनों ने बताया सुखलिया, किला मैदान, नंदानगर स्थित एटीएम से करीब 15 लाख रुपए चुराए थे। नंदानगर स्थित एटीएम से करीब साढ़े तीन लाख रुपए निकाले थे। इन पैसों की भरपाई के लिए किला मैदान स्थित एटीएम से निकाले रुपए जमा कर दिए थे। बाकी रुपए विजय ने अपनी प्रेमिका को दे दिए थे। पुलिस ने बैंक अधिकारी, बैंक में रुपए जमा करने वाली कंपनी एसआईएस के अधिकारी और रखरखाव करने वाली कंपनी एफएसएस के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है। तीनों एजेंसी के एटीएम और बैंक रिकॉर्ड के ऑडिट करने के बाद असल रुपए की चोरी का आंकड़ा पता चल पाएगा। ऑडिट नहीं होने की वजह से दोनों कर्मचारी लंबे समय से एटीएम से रुपए चुरा रहे थे। भरपाई के लिए इस एटीएम का रुपए दूसरे में जमा करके अपना जुर्म छिपा लेते थे।
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