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उपचुनाव करैरा : बसपा में प्रागी का विकल्प भाजपा के लिए राहत साबित …@AJAYSINGHKUSHWAHA

अजय सिंह कुशवाह शिवपुरी। जिले की पांच सीटों में एकमात्र आरक्षित करैरा विधानसभा सीट पर राजनैतिक रोमांच अब धीरे-धीरे अपने  चरम  की ओर अग्रसर होता नजर आ रहा है। जैसे कि पूर्वानुमान लगाए जा रहे थे ,काँग्रेस ने अपना ट्रम्प कार्ड चलते हुए बसपा के प्रागीलाल जाटव को पार्टी में शामिल कर भाजपा को शह दी है। किंतु …अभी इसे भाजपा की मात नही माना जा सकता है।
हालांकि प्रागी का काँग्रेस-प्रवेश  काँग्रेस के लिए भी किसी सिरदर्दी से कम साबित नही हुआ है,क्योंकि दर्जन भर काँग्रेसियों ने प्रदेश के जिम्मेदारों को पत्र लिख कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए प्रागी को टिकिट दिए जाने पर पार्टी छोड़ने तक की चेतावनी दे डाली है । किंतु जैसा कि राजनीति में अक्सर होता आया है कि होये वही जो राम रचि राखा….सो यह भी लगभग तय मान कर ही चलिये कि प्रागीलाल ही काँग्रेस की पतवार थाम कर चुनावी वैतरणी में उतरने वाले हैं ,और  भाजपा का सिरदर्द भी बनेंगे …इसमें  शक की कोई गुंजाइश नही नज़र आ रही है। 
अब भाजपा प्रागीलाल के विरूद्ध क्या चुनावी रणनीति बनाएगी यह तो विचारणीय होगा ही किंतु बसपा के पास प्रागीलाल का योग्य विकल्प कौन होगा ये भी उतना ही गौरतलब मुद्दा है। दरअसल ये दोनों ही प्रश्न एक दूसरे के पूरक हैं या फिर ये कहा जाए कि बसपा के लिये महत्वपूर्ण इस मुद्दे में ही भाजपा के हित भी निहित होंगे ,तो ये अतिश्योक्ति नही होगी। 
बसपा के लिए यह कड़वा सत्य है कि करैरा सीट पर प्रागी जाटव से बेहतर चेहरा अब उसके पास नही है।  अब यदि बसपा की नज़र किसी बागी काँग्रेसी पर आगयी तो ये एक बड़ा ट्विस्ट होगा करैरा की उपचुनाव -स्टोरी में। वैसे भी अंदर के सूत्र इशारा दे रहे हैं कि पत्र लिखकर चेतावनी देने वाले काँग्रेसियों की नज़रों में  भी बसपा  एक बेहतर विकल्प है। अगर हम बसपा के वोटबैंक की बात करें तो करैरा विधानसभा जिले की सर्वाधिक बसपाई वोटबैंक वाली सीट है,यहाँ बहुजन समाज पार्टी के मतों की संख्या लगभग 50 हज़ार है। प्रागी के कारण काँग्रेस से छिटकने वाले संभावित उम्मीदवारों की संख्या भी अच्छी खासी होगी। ऐसे में बसपा के पास किसी वजनदार   बागी काँग्रेसी के नाम पर दांव लगाने का अच्छा मौका है। काँग्रेस के टिकिट से वंचित उम्मीदवारों में प्रमुख नाम पूर्व विधायक शकुंतला खटीक ,सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर एवं प्रदेश पदाधिकारी के एल राय, अ.जा.मोर्चा के जिलाध्यक्ष योगेश करारे, ग्रामीण क्षेत्र और युवक कांग्रेस के प्रदेश के नेता मान सिंह फौजी और जिला पंचायत सदस्य दिनेश परिहार के हैं। इनमें से अधिकांश नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया के विश्वस्त माने जाते हैं। शकुंतला खटीक की क्षेत्र में कमज़ोर पकड़ उन्हें बसपा की नज़रों में चढ़ने के लिए बड़ी बाधा है,जबकि के एल राय और योगेश करारे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नज़दीकी और बाहरी होने की छाप लगी है । दिनेश परिहार का क्षेत्रीय जनाधार उतना मज़बूत नही माना जा रहा है जितना कि युवक काँग्रेसी मान सिंह फौजी का है। मान सिंह जाटव समाज का प्रतिनधित्व करते हैं ।करैरा में प्रायः जाटव प्रत्याशी का मुकाबला अन्य समाज के प्रत्याशियों से होता आया है,जो कि बसपा के मैदान मारने में बाधा का कारण भी बनता चला आ रहा है। प्रागी जाटव को भी तकरीबन पिछले हर चुनाव में इस फैक्टर से बड़ा नुकसान हुआ है। किंतु करैरा में इस बार दोनों प्रमुख दलों के संभावित उम्मीदवार जाटव समाज से ही हैं तो अब यदि बसपा ने भी  मान सिंह या उन जैसे किसी स्थानीय वजनदार प्रत्याशी पर जुआ खेल दिया तो करैरा में एक रोचक और कांटे का त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है,सन्देह नही।हवा का रुख कांग्रेस से भाजपा में आये जसवन्त जाटव के लिए भी सहज नही है। ऐसे में कांग्रेस के प्रागीलाल  से निपटने के लिये भाजपा को भी बसपा से किसी दमदार नाम के सामने आने से ही फायदा होगा अर्थात प्रत्याशी-चयन का गणित ही दलों के  नफा-नुकसान का सबब बनेगा।
कुल मिलाकर बसपा का प्रत्याशी तय होने के बाद करैरा का चुनावी गणित स्पष्ट होगा। किंतु तब तक यहां की राजनीतिक बिसात पर गोटियां कैसे -कैसे चलीं जाएंगी ये देखना निश्चित ही रोचक होगा।
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