शिवपुरी जिले के पिछोर में शनिवार शाम को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जनसुनवाई का आयोजन किया था। शिविर में प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और पिछोर विधायक प्रीतम लोधी भी उपस्थित रहे। शिविर में 500 से अधिक लोगों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें आवास, इलाज, नामांतरण, बिजली, राजस्व, सीमांकन और बंटवारे से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रहीं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मंत्री सिंधिया के जाते ही अधिकारियों-कर्मचारियों ने आवेदनों को गंभीरता से लेने के बजाय रद्दी में फेंक दिया। उन्होंने बताया कि आवेदनों को सुरक्षित रखकर समाधान किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने लापरवाही बरती। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने जनसुनवाई को नौटंकी बताया है।
रात 9 बजे तक चली जनसुनवाई
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम से रात 9 बजे तक पिछोर के शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय प्रांगण में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। शिविर में प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और पिछोर विधायक प्रीतम लोधी भी उपस्थित रहे। 500 से अधिक लोगों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई।
मंत्री सिंधिया ने कुछ शिकायतकर्ताओं की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। कब्जे की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक को मौके पर फोर्स भेजने के आदेश भी दिए गए।
शिविर में दिव्यांगजनों को 55 कृत्रिम उपकरण वितरित किए गए, जिसमें 14 ट्राईसाइकल, 2 मोटराइज्ड ट्राईसाइकल और 5 व्हीलचेयर शामिल थीं। वहीं, स्वास्थ्य शिविर में 250 से अधिक मरीजों का इलाज हुआ और 17 आयुष्मान कार्ड बनाए गए।
लाेगों का आरोप- अधिकारियों ने रद्दी में फेंके आवेदन
लोगों ने बताया कि शिविर के दौरान उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय मंत्री उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान कराएंगे। लेकिन, मंत्री सिंधिया के जाते ही अधिकारियों-कर्मचारियों ने आवेदनों को गंभीरता से लेने के बजाय रद्दी में फेंक दिया।
अपने आप को भाजपा महामंत्री बीजेपी बता रहे ओम प्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि उनके आवेदनों को सुरक्षित रखकर समाधान किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने लापरवाही बरती।
वहीं अन्य लोगों ने बताया कि इस तरह के शिविर महज दिखावा बनकर रह जाते हैं, जहां केवल कुछ लोगों की समस्याओं का निराकरण होता है, जबकि बाकी जनता सिर्फ आश्वासन लेकर लौट जाती है।







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