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दुआ है ये कि आंगन में न दहशत हो न दंगा हो, धरा धर्मों का संगम हो, सदा गोदी में गंगा हो: मुन वैशाली / Shivpuri News

मार गई मोहिनी मोहना पे कुंजगलिन की ये कौन किशोरी: मनु वैशाली 

स्वदेशी मेले में कवियों ने अर्धरात्रि तक बांधा समां, हास्य, वीर, श्रूंगार रस से ओतप्रोत कविताओ की श्रृंखलाओ ने जमकर बटोरीं तालियां…..
शिवपुरी: दुआ है ये कि आंगन में न दहशत हो न दंगा हो,  धरा धर्मों का संगम हो सदा गोदी में गंगा हो, रहे जब तक रहे भारत की ही माटी में जीते हम, मगर जब हो दफन हो तब तो कफन केवल तिरंगा हो। राष्ट्रीय पटल अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लेने वाली शिवपुरी की बेटी मनु वैशाली ने कल पोलोग्राउण्ड में स्वदेशी जागरण मंच के स्वदेशी मेले में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश भक्ति से ओतप्रोत ये पंक्तियां पढीं तो पूरा पाण्डाल तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा। मनु वैशाली ने वीर, श्रृंगार रस से ओते प्रोत कवितायें कवि सम्मेलन में सुनाईं। मनु वैशाली ने अपनी कविताओं का प्रारम्भ त्याग वाला राग छंद साहसी शहादत का शौर्यता की गाथा कविता कहानी हो गए, देश की धरोहर वे पूत बलिदानी वीर वीरता की जीती जागती निशानी हो गए पंक्तियों से की।
शिवपुरी के पोलो ग्राउण्ड में चल रहे स्व्देशी मेले में हास्य, व्यंग, वीर, श्रृंगार रस के कवियों ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता 12 बजे तक कवि सम्मे्लन में बैठे रहे और सभी सुधि श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं को सुना। कवि सम्मेेलन का प्रारंभ कवि सरल द्वारा सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इसके बाद शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ  आशीष पटेरिया ने अपने काव्यं पाठ का प्रारंभ इन पंक्तियों से किया कि बांधिये ने हमको बंधनों में हमें स्वीकार नहीं, पडे रहें गले में किसी के हम वो फूलों के हार नहीं। इसके बाद फिल्मी गीतकार बाबू गीतेश्वर घायल ने सुनाया, एक कतरे को समंदर कह दिया तो कह दिया और हमने प्यादे को कलंदर कह दिया, हौसलों की बात है ये क्यों डरें किससे डरें हमने खुद को गर सिकंदर कह दिया तो कह दिया  सुनाया। टिमरनी म.प्र. से आए हास्यं कवि मुकेश शांडिल्य ने पति पत्नि के आपसी प्रेम को हास्य से परिपूर्ण काव्य पाठ के माध्यंम से बताया कि संबंधों को यार निभाना पडता है बीबी के भी पांव दबाना पडता है, बीबी का डर ऐसा घर में होता है, शेर को भी पूंछ हिलाना पडता है। रायसेन से आए कवि दिनेश याग्निक ने वीर रस से ओत प्रोत कविताओं का पाठ किया तथा ग्वालियर से आए वीर रस के कवि रामकिशोर उपाध्याय ने भी बांग्लादेश में हिन्दु ओं पर हो रहे अत्याोचारों को अपनी कविताओं के माध्यम से सुनाया। शिवपुरी के सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. एच.पी. जैन ने भी काव्य पाठ किया। अंत में सुप्रसिद्ध कवियत्री मनु वैशाली ने काव्य पाठ किया जिनको सुनने श्रोता अर्धरात्रि तक बैठे रहे। मनु ने अपने मोहिनी छंद और गांव के जीवन का सजीव चित्रण करते हुए हुए काव्य पाठ किया। कवि सम्‍मेलन का संचालन कवि आशुतोष ओज ने किया।
9 साल की उम्र में शिवपुरी में कवि सम्मेलन सुना तभी ठाना की कवि बनना है….
आज शिवपुरी कवि सम्मेेलन में काव्य पाठ करने आईं वैशाली पाल जिन्हें  अब काव्य जगत में मनु वैशाली के नाम से जाना जाता है उन्होंने बताया कि मुझे मेरे पिता 9 साल की उम्र में इस शर्त पर शिवपुरी के गांधी चौक पर बल्‍लभदास गोयल जी की की स्मृति में होली पर आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन में लेकर आए कि सोना नहीं और मैंने तब पूरा काव्य पाठ सुना और तभी ठाना कि इस मंच पर काव्य पाठ करना है तब से कवि बनने का सपना संजोया और आज वही बच्चीा मनु वैशाली के रूप में आपके खडी है।

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