गाजियाबाद/मेरठ/नोएडा

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आज यानी 16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुबह से ही पुलिस ने बुलंदशहर और मेरठ में प्रमुख किसान नेताओं को नजरबंद करना शुरू कर दिया।
वहीं, मुजफ्फरनगर में मंडी को बंद कर दिया गया है। इटावा में किसानों के समर्थन में महिलाएं सड़क पर बैठ गई हैं। नारेबाजी हो रही हैं। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए चिल्ला बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर दी गईं हैं।
मेरठ में किसानों ने काम बंद किया
वेस्ट यूपी के मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल में किसानों ने काम बंद किया है। किसानों के मूवमेंट पर LIU और लोकल पुलिस निगाह बनाए हुए हैं।
गाजीपुर बॉर्डर पर 2Km लंबा जाम
गाजीपुर बॉर्डर पर आज सुबह से करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है। फार्मर प्रोटेस्ट के चलते दिल्ली पुलिस ने आज यूपी से दिल्ली में घुसने वाली गाड़ियों की चेकिंग शुरू कर दी है। इस वजह से गाजीपुर बॉर्डर पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई है।
मुजफ्फरनगर में 10 जगह प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर में 10 पॉइंट्स पर किसान धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। नेशनल हाईवे-58, गंगनहर पटरी, कांवड़ मार्ग सहित अन्य स्थानों पर ये प्रोटेस्ट चल रहे हैं। यहां पुलिस बल मौजूद हैं।
इटावा में किसान और महिलाएं सड़क पर बैठे, नारेबाजी शुरू

दिल्ली कूच का आह्वान था, रात 1 बजे घर पुलिस पहुंची
बुलंदशहर के सिकंदराबाद में भारतीय किसान यूनियन (अ) के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बिन्नू अधाना को देर रात 1 बजे ही पुलिस ने घर में नजरबंद कर दिया। बिन्नू ने आज किसानों संग दिल्ली कूच का आह्वान किया था। भारतीय किसान यूनियन (चढ़नी) कार्यकर्ताओं ने पंजाब के किसानों के समर्थन में आज दोपहर 2 बजे अलीगढ़ जिले के गभाना टोल प्लाजा को फ्री कराने का ऐलान किया था। इससे पहले ही खुर्जा जंक्शन पुलिस ने जिलाध्यक्ष सूबे सिंह डागर को घर पर नजरबंद कर दिया है।
राकेश टिकैत ने कहा- न हम किसानों से दूर, न दिल्ली हमसे दूर
पंजाब-हरियाणा के बॉर्डरों पर किसान आंदोलन चल रहा है, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और उसका घटक संगठन भारतीय किसान यूनियन उस आंदोलन में शामिल नहीं हैं। हमने इस मामले पर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से बातचीत की। उन्होंने कहा, “पंजाब जब इकट्ठा रहता है तो पूरे देश को जोड़ सकता है। अब पंजाब में आपस में तीन चार संगठन बन गए हैं। SKM ने अपनी ग्रामीण भारत बंद कॉल 16 फरवरी को दी है। जबकि पंजाब के अन्य कुछ संगठनों ने दिल्ली जाने की कॉल दी है। वे दिल्ली नहीं पहुंच पाए तो रास्ते में बैठ गए। मुद्दे सबके एक हैं। न हम किसानों से दूर हैं, न हमसे दिल्ली दूर है। प्रदर्शनकारी किसानों से सरकार बातचीत करे और समाधान निकाले।”
‘पंजाब के किसान संगठनों के कुछ मुद्दों पर हम सहमत नहीं’ राकेश टिकैत ने कहा, “दिल्ली में पिछली बार जब आंदोलन था, उसमें 40 किसान संगठनों के नेता थे। उस आंदोलन के बाद बीते दो साल में हम सभी किसान संगठनों ने पुन: बैठकर बातचीत करना चाही कि वे इकट्ठा रहें, लेकिन अभी सारी जत्थे बंदियां एकजुट नहीं हैं। पंजाब के फार्मर्स संगठनों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर हम सहमत नहीं हैं। मेरा मानना है कि किसान संगठनों को पॉलिटिक्स से दूर रहना चाहिए। पंजाब के किसानों का आंदोलन अभी एसकेएम का नहीं है।”










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