शिवपुरी: मेडिकल स्टोर पर दवा लेने जाएं तो पक्का बिल कोई भी संचालक नहीं देता, सिर्फ हाथ से पर्ची पर दवा की कीमत और टोटल लिख दिया जाता है। अगर कोई क्लेम करना चाहे तो ग्राहक के पास कोई सबूत नहीं कि उसने किस मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी है। यह मनमानी अब से नहीं काफी समय से यहां चल रही है।
शासन ने मेडिकल दुकानों में दवा की खरीदी करने पर ग्राहकों को पक्का बिल देना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन करैरा में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। अधिकांश मेडिकल संचालक इसकी अनदेखी कर रहे हैं। दवा खरीदी करने के बाद ग्राहकों को बिल नहीं दिया जाता। खास बात यह है कि ड्रग्स इंस्पेक्टर भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मालूम हो कि वर्तमान में मौसम बदल रहा है बावजूद इसके लोग खानपान में लापरवाही बरत रहे हैं। वातावरण प्रदूषित करने से आमजन की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है, इसलिए सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ नजर आ रही है। मरीजों की संख्या में इजाफा होने पर मेडिकल दुकान संचालक मनमानी पर उतारू है। कस्बे में संचालित मेडिकल दुकानदार दवा खरीदने पर ग्राहकों को बिल नहीं दे रहे हैं इसके अलावा मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
मेडिकल की दुकान पर रोजाना हजारों-लाखों रुपए तक का व्यवसाय होता है। शासन ने अन्य व्यवसाय की तरह मेडिकल दुकानों पर भी दवा खरीदी करने पर बिल देना अनिवार्य कर दिया है। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी गई है, जिसे विभागीय अधिकारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं। जिसका खामियाजा मरीजों के परिजनों को उठाना पड़ रहा है।
इसलिए है बिल जरूरी
अधिकांश मेडिकल दुकानदार ग्राहकों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। ग्राहकों से तय मूल्य से अधिक कीमत वसूली जाती है। इसके अलावा कई बार गलत दवा भी दे दी जाती है। दवा खरीदने का पक्का बिल नहीं होने से ग्राहक कुछ नहीं कर पाते, इसलिए शासन से मेडिकल संचालकों को अनिवार्य रूप से बिल देने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल संचालकों को एक तो उनको निर्धारित टैक्स शासन को नहीं देना पड़ता, वहीं बिल देने पर यह टैक्स और जीएसटी दोनों देनी पड़ेगी, बिल ना देकर वह सस्ती दवाएं भी नई रेट में बिक्री कर देते हैं जबकि बिल देने पर यह संभव नहीं होगा।
हर डॉक्टर का मेडिकल स्टोर
नगर में ज्यादातर डॉक्टरों की क्लिनिक पर खुद का मेडिकल स्टोर है, क्योंकि असल कमाई मेडिकल स्टोर से है। अपनी पसंद की कंपनियों की दवा मंगा कर रखते हैं, जिनमें 50% मुनाफा मेडिकल दुकानदार संचालक को दवा खरीदने पर रहता है। इतना ही नहीं मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाइयां भी बेची जा रही हैं।
ग्राहकों को बिल लेना चाहिए
दिनेश चंद्र शुक्ला एसडीएम करैरा ने कहा कि मेडिकल दुकान संचालकों को दवा खरीदने पर बिल देना अनिवार्य किया है, लेकिन ग्राहकों को भी बिल मांगना चाहिए। दवा खरीदने पर बिल लेना ग्राहक की भी जिम्मेदारी है। शिकायत मिलेगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों से वसूल रहे मनमाने दाम, SDM ने कहा- ग्राहक भी निभाएं जिम्मेदारी / Shivpuri News
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