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अच्छी खबर: 4 मार्च को शिवपुरी में दहाड़ेंगे टाइगर, एक नर दो मादा टाइगर लाए जाएंगे / Shivpuri News

शिवपुरी में टाइगर लाने की स्वीकृति मिलने के बाद से ही लगातार नई तारीखें सामने आती रहीं। पहले नवंबर- दिसंबर तक टाइगर लाए जाने का बात कही जा रही थी। इसके बाद 15 जनवरी तक की नई टाइमलाइन तय की गई। जब 15 जनवरी बीत गई तो जनवरी के अंत तक हर हाल में टाइगर लाने का दावा अधिकारियों ने किया, लेकिन हर बार नतीजा सिफर रहा।

अब नेशनल पार्क में चार मार्च को एक नर और वे मादा बाघ लाए जा रहे हैं। यह टाइगर सतपुड़ा से लाए जाएंगे। इन्हें पहले ही इन्क्लोजर में रखा हुआ है। मादा बाघों को लेकर अधिकारियों ने नर बाघ भोपाल के बन बिहार से स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन इसमें से एक मादा पन्ना टाइगर रिजर्व की बताई जा रही है।

बाघों को नए वातावरण से अभ्यस्त करने के लिए शुरुआती 15 दिनों तक बाड़े में रखा जाएगा। इसके लिए एक या ओवल आकार का बड़ा बनाया गया है जिसे तीन हिस्सों में बाटा गया है। प्रथम चरण में एक नर और दो मादा बाघ आ रहे है । नर बांघ को दोनों मादा बाघों के बीच में रखा जाएगा। इनके बीच जालिया रहेंगी जिससे एक दूसरे के संपर्क में नहीं आ पाएंगे, लेकिन सुघ सकेंगे बाड़े में 15 फीट ऊंची जाली लगाई गई है। मानीटरिंग के लिए स्टाफ का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल पार्क प्रबंधन ने अपने और से तैयारियां जनवरी में ही पूरी करके बैठा है।लेकिन ऊपर से हरी झंडी मिलने का इंतजार था। अब आखिरकार भोपाल से हरी झंडी मिल गई है और अधिकारियों से मिनट- टू-मिनट कार्यक्रम का ब्यौरा मांगा गया है। आगामी सप्ताह में तैयारियों को जानकारी के साथ कार्यक्रम का ब्यौरा भोपाल भेज दिया जाएगा। संभवत मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री सिंधिया इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ट्रैकुलाइज करके विशेष पिंजरों में लाएंगे
बाघों अलग-अलग नेशनल पार्क से लाए जा रहे हैं। इन्हें लाने के पहले ट्रॅक्लाइन किया जाएगा और फिर विशेष पिंजरों से शिवपुरी नेशनल पार्क लाया जाएगा। इन्हें बाड़े में छोड़ने की भी विशेष व्यवस्था की गई है। अतिथि बाहर से पहिया घुमाकर पिंजरे का गेट खोलेंगे और टाइगर उनके लिए बनाए गए विशेष बाहे में चले जाएंगे।

इसका कहना है
नेशनल पार्क में बाघ फिर से स्थापित किए जा रहे हैं। इसक लिए चार मार्च की तिथि तय की गई है। हम तय कार्यक्रम के अनुसार बाघ लेकर आएंगे। इससे पार्क में पर्यटन बढेगा और यहां का इकोसिस्टम भी बेहतर होगा। इस परियोजना के तहत पहले चरण में तीन टाइगर यहाँ लाए जाएंगे।
उत्तमकुमार शर्मा, सीसीएफ बाघ परियोजना

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