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कोलारस बस स्टेण्ड भूमि पूजन: कोलारस बस स्टेण्ड का मामला, जगदीश जादौन ने लगाए आरोप, पढ़िए खबर / Shivpuri News

शिवपुरी: शिवपुरी में इस समय कोलारस विधानसभा में लगातार कोलारस विधायक रघुवंशी का विवाद सुर्खियों में नजर आ रहा है. ऐसे ही कई मामले विकास यात्रा के दौरान सामने आए हैं. जिला पंचायत अध्यक्ष से भी विवाद नजर आया था. पूर्व जनपद अध्यक्ष से भी विवाद नजर आया था. अब आपको बता दें कि कोलारस बस स्टैंड का भूमि पूजन किया गया है. जिसके चलते कोलारस बस स्टैंड के भूमि पूजन के बाद बस स्टैंड का मामला भी सुर्खियों में आया है जगदीश जादौन ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट की है.

पढ़िए जगदीश जादौन की पोस्ट

कोलारस_बस_स्टैंड_की_हकीकत

लेटर के लाल घेरे पर नजर डाले

मित्रों कोलारस के नये बस स्टैंड के निर्माण राशि भूमि अधिग्रहण को लेकर बिगत कुछ दिनों से चिल पों मची हुई है जबकि हकीकत क्या है वह यह कागज बयान कर रहे है। कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर आपको देखने मिल रहा होगा कि बस स्टैंड के लिए भूमि आवंटन कराकर राशि भी स्वीकृत करा दी है जबकि आप खसरे की नकल के लाल घेरे में नजर डाले तो आपको देखने मे आएगा कि बस स्टैंड को भूमि तो 2013 में ही आवंटित हो गई थी क्योंकि खसरे में आदेश क्रमांक दिनांक सहित डला हुआ है।यह बात तो हुई भूमि की
अब बात करते है बस स्टैंड के निर्माण राशि की जैसा कि कहा जा रहा है कि बस स्टैंड के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत करा दिए जब कि दूसरी विज्ञप्ति के कॉलम नंबर 11 में आप देखेंगे कि निकाय की वित्तीय स्थिति अनुसार ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा इससे साफ स्पष्ट होता है कि बस स्टैंड के लिए आवंटन राशि स्वीकृत नहीं हुई है यदि राशि स्वीकृत हो जाती तो फिर नगर परिषद इस तरह की शर्त अपनी विज्ञप्ति में क्यों दर्ज कराती जबकि सच्चाई यह है कि
बस स्टैंड पर दुकानों का निर्माण कराकर उनकी नीलामी से जो पैसा प्राप्त होगा उससे ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा। विज्ञप्ति एवं खसरे की नकल से साफ जाहिर होता है कि केवल झूठा नारियल फोड़ा गया है फीता नही कटेगा बस स्टैंड का हाल भी जगतपुर तिराह पर निर्मित शॉपिंग कंपलेक्स की तरह ही होगा

नोतंकी गैंग कुछ कह रही है जबकि बस स्टैंड निर्माण की फाइल सब कुछ बयां कर रही है। की 2o13 में कौन नगर परिषद अध्यक्ष था और कौन विधायक और राशि की बात है तो यदि बस स्टैंड के निर्माण की राशि आ जाती तो विज्ञप्ति के कॉलम नंबर 11 में यह किसी विभागीय अधिकारी की हिम्मत नही होती कि हमारी संस्था की वित्तीय स्थिति के आधार पर हम ठेकेदार को भुगतान करेंगे

नोट यदि किसी को लगता है कि यह लेटर ,खसरे की नकल और मेरे द्वारा लिखी गई बातें गलत है तो आजकल इंटरनेट मोबाइल का जमाना है MP ई टेंडिंग की साइट पर जाकर पूरी फ़ाइल देख सकते है।

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