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मोबाइल कोर्ट: मजिस्ट्रेट ने की स्कूल बसों की चेकिंग, कैमरा लगा दिखावटी / Shivpuri News

शिवपुरी: शहर में आज स्कूली बस सहित यात्री बस संचालकों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। दरअसल, आज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सज्जन सिंह सिसोदिया के द्वारा मोबाइल कोर्ट का आयोजन पोहरी चौराहा, पोहरी बस स्टैंड एवं कटमई चौराहा पर किया गया। इस दौरान कई स्कूली बसों सहित यात्री बसों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बसों के लिए जारी 18 बिंदुओं की जांच की गई। जैसे ही इस बात की खबर शहर में फैली बस संचालकों एवं बस ड्राइवरों में हड़कंप मच गया और किसी ने बसों को रास्ते में ही रोक दिया तो कई बसें रास्ता बदलकर निकलते दिखाई दीं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सज्जन सिंह सिसोदिया ने यातायात पुलिस एवं कोतवाली पुलिस के साथ 25 स्कूली बसों एवं 7 प्राइवेट यात्री बसों को चेक किया गया। जिनमें सुप्रीम कोर्ट के 18 बिंदुओं के तहत कई कमियां पाए गई हैं। उक्त सभी बसों की सूची तैयार की गई है। जिसे न्यायालय प्रस्तुत की किया जाएगा और संबंधित बस मालिकों एवं ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

चेकिंग के दौरान जांची गई स्कूल बसों में अधिकतर बस के चालक ने नाही वर्दी पहन रखी थी और नाही नेम प्लेट लगाई हुई थी। कई स्कूली बसों में चालक ही स्कूल की बस को अकेला चला रहा था। उक्त बस में क्लीनर की भी व्यवस्था नहीं की गई थी। जो कि एक बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। ऐसे में जब बच्चे बस से उतर कर अपने घर के लिए जाते हैं। कभी भी हादसा घटित होने की संभावना बनी रहती है। अधिकतर बस स्टाफ पर मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं था।जबकि, मेडिकल सर्टिफिकेट को भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने 18 बिंदुओं में जगह दी है। कई स्कूली बसों में शिक्षक ही सवार नहीं थे। जबकि, स्कूली बसों में शिक्षकों का भी होना अनिवार्य है। खासतौर पर अगर स्कूल बस में कोई छात्रा सवार है तो उसमें महिला शिक्षक का होना विशेष रुप से अनिवार्य किया गया है। यह बिंदु भी उन 18 बिंदुओं में शामिल किए गए हैं।

न फर्स्ट एड बॉक्स ना ही स्पीड गवर्नर, ना ही बसों में मिला इमरजेंसी गेट

पुलिस जांच में कई स्कूली बसें ऐसी भी थी, जिनमें अत्यंत जरूरी फर्स्ट एड बॉक्स तक बस में मौजूद नहीं था। इसके साथ ही कई बसों में स्पीड गवर्नर को भी नहीं लगाया गया था। कई बसों में इमरजेंसी गेट तक नहीं था। जबकि तीनों बिंदु बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद शिवपुरी शहर की कई स्कूली बसों में इस प्रकार की लापरवाही भी मिली। कई स्कूली बसें ऐसी भी शामिल थीं, जिनमें अग्निशमन यंत्र तक मौजूद नहीं था। कई चालक बिना लाइसेंस के ही स्कूली बसों को फर्राटा भर रहे थे।

25 स्कूली बसों के 22 के पास नहीं था चरित्र प्रमाणपत्र

देश-प्रदेश में अब तक कई स्कूलों से घटनाएं ऐसी सामने आ चुकी है। जिसमें घटनाओं को अंजाम देने वाला बस स्टॉफ ही था। फिर चाहे मामला अपरहण से जुड़ा हो या फिर शारिरिक शोषण का, इसी को मद्देनजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बसों को लेकर जो बिंदु जारी किए थे, उन बिंदुओं में एक बिंदु मुख्यता स्कूल बस स्टाफ के चरित्र प्रमाण पत्र का भी है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन द्वारा लापरवाही बरती जा रही है स्कूल प्रबंधक बिना चरित्र प्रमाण पत्र के ही स्कूल बस के स्टाफ को नियुक्त कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण आज सामने आया, जहां जांच के दौरान 25 बसों में से महज 3 बस स्टाफ के पास चरित्र प्रमाण पत्र मिला है। बाकी शेष किसी भी स्कूली बस के स्टाफ के पास उनकी बस की फाइल में चरित्र प्रमाण पत्र नहीं लगा कर रखा था।

स्कूली बसों में कैमरा लगे मगर दिखावटी

जांच के द्वारा आज पाया गया कि शिवपुरी शहर में चलने वाली स्कूली बसों में जो कैमरे लगे हुए हैं, वह सभी कैमरे दिखावटी हैं। पुलिस पड़ताल में जानकारी सामने आई कि आज जांच की गई 25 स्कूली बसों में से एक बस का भी कैमरा चालू नहीं था उक्त बस में लगे सभी कैमरे दिखावटी पाए गए जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के जारी 18 बिंदुओं में से भी एक बिंदु बसों में कैमरा लगाने के लिए भी बनाया गया है।

सात यात्री बसों पर भी हुई कार्रवाई

इस दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 7 यात्री बसों की जांच की उक्त बातों में ना ही कैमरा लगे थे ना ही चालक वर्दी में थे। चालकों के पास चरित्र प्रमाण पत्र सहित मेडिकल सर्टिफिकेट तक नहीं था इसके अलावा कई बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हुए थे उक्त बसों पर भी अब कार्रवाई की जाएगी।

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