शिवपुरी। सरकारी फाइलों में जिला अस्पताल को ऑल इज वेल बताने वाला अस्पताल प्रबंधन की हकीकत देखी जाए तो कुछ और ही है। यहां पदस्थ स्टाफ व डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली लापरवाही अक्सर देखने को मिल जाती है। कभी मरीज को स्ट्रेचर, बेड, दवाई नहीं मिलती तो कभी डॉक्टर मरीज का इलाज सही तरीके से नहीं करते हैं। इतना ही नहीं भर्ती मरीजों के पर्चे तक खो जाते हैं। यहां देखा जाए तो सरकार से मोटी तनख्वा लेने वाले डॉक्टर व स्टाफ मरीजों की सेवा न करते हुए प्रायवेट अस्पताल में अपना मन लगा रहे हैं। इसलिए दवाई से लेकर प्रायवेट अस्पतालों में यह डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसा ही मामला उस समय देखने में आया जब दीपसिंह अपने पिता को अस्पताल लेकर आया। दरअसल दीपसिंह के पिता का पैर ट्रेक्टर की टक्कर से टूट गया था। जब वह अपने पिता को अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्हें स्ट्रेक्चर ही नहीं मिला। जैसे-तैसे अपने पिता को तमाम परेशानियों के बावजूद अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां नर्सों ने दवाई व गोली दे दी। जब डॉक्टर देखने आए तो उन्होंने मरीज को एक्सरा कराने के लिए एमएम हॉस्पिटल के लिए लिख दिया। डॉक्टर बोले एमएम हॉस्पिटल जाओ और एक्सरा करवा कर लाओ। दीपसिंह ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि उनके पिता का कोई इलाज नहीं किया इतना ही नहीं एक्सरा अस्पताल में कराने की वजाए प्रायवेट अस्पताल में एक्सरा करवाने के लिए भेज दिया।






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