
शिवपुरी/ शहर की साहित्यिक संस्था बज्मे उर्दू की मासिक काव्य गोष्ठी गांधी जयंती एवं लालबहादुर शास्त्री जयंती पर गांधी सेवाश्रम में आयोजित की गई।
शकील नश्तर की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस गोष्ठी का संचालन सत्तार शिवपुरी ने यह कहकर किया-
में उसका नाम लेकर बज्म का आगाज करता हूं,
के जो कलियां खिलाता है के जो सूरज उगाता है।
गोष्ठी के आरंभ में भगवान सिंह यादव ने कहा –
विगत उन दिनों की कहानी लिखूं क्या,
गुजर को गई वो जवानी लिखूं क्या।
वहीं विनोद अलबेला लिखते हैं-
आज कल की कैसी पढ़ाई हो गई,
टिक मार्क लगाया लिखाई हो गई।
वहीं सत्तार शिवपुरी ने कहा –
मेरा बेटा हज करवाए ये भी तो हो सकता है,
गिन – गिन कर के रोटी आये ये भी तो हो सकता है।
मो. याकूब लिखते हैं –
तुम्हारी नजर में मोहब्बत खता है,
तो हम बेखतर ये खता कर रहे हैं।
संजय शाक्य ने कहा –
ये संतों और पीरों की ये भारत भूमि वीरों की।
बज्म के सचिव इशरत ग्वालियरी लिखते हैं –
काम आओ हर इक के दुख सुख में मजहबे जातें उसकी मत पूछो।
आदमियत का ये तकाजा है तुम पड़ोसी की खैरियत पूछो।
बज्म के अध्यक्ष हाजी आफताब अलम, मुकेश अनुरागी, शकील नश्तर, इरशाद जालोनवी, राधे श्याम सोनी, राम कृष्ण मोर्य, राकेश सिंह, राजकुमार भारती, भगवान सिंह यादव, ने भी अपनी मधुर रचनाएं पढ़ी।
अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद सत्तार शिवपुरी ने सभी साहित्यकारों का शुक्रिया अदा किया।






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