शिवपुरी। पिछले एक दशक से भी लंबे समय में माधव नेशनल पार्क के लिए टाइगर कागजों में दहाड़ रहा था। तमाम पत्राचार, दावे और योजनाओं इसके लिए बनाई गईं, लेकिन जमीन पर कुछ खास असर दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन अब यह तय हो गया है कि शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में जल्द ही टाइगर की दहाड़ सुनने को मिलेगी। गत सप्ताह भोपाल में हुई बैठक में इस संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा चुके हैं और प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो गया है। माधव नेशनल पार्क में कान्हा टाइगर रिजर्व की तर्ज पर टाइगर को बसाया जाएगा। यहां की टाइगर सफारी का डिजाइन भी इसी से प्रेरित होगा। माधव राष्ट्रीय उद्यान को छोड़कर एवं राष्ट्रीय उद्यान से लगे हुए उपयुक्त वन क्षेत्र में टाइगर सफारी के लिए 100 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान कर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार नक्शे पर दर्शाते हुए योजना तैयार की जाएगी। यह कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की में टाइगर सफारी के लिए तैयार किए गए डिजाइन के अनुसार होगी। इसके लिए मास्टर ले आउट प्लान, इन्क्लोजर डिजाइन, डीपीआर सीजेडए को भेजना होगा। इसे लेकर भोपाल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) कार्यालय में गत सप्ताह बैठक हुई थी जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार, एनटीसीए के अतिरिक्त वन महानिदेशक एसपी यादव, लॉयन प्रोजेक्ट शिवपुरी के संचालक सीएस निनामा, माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी के सहायक संचालक अनिल सोनी सहित उच्च अधिकारी मौजूद थे। टाइगर आने के साथ शहर के पर्यटन की दिशा में बड़ा बदलाव होगा। एक बार फिर पर्यटक शिवपुरी की ओर रुख करेंगे और यहां रोजगार बढ़ेगा।
एक अच्छी खबर यह है कि शिवपुरी में सिर्फ एक टाइगर नहीं, बल्कि टाइगर का जोड़ा लाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो यहां एक से अधिक जोड़े भी आ सकते हैं। बांधवगढ़ में अभी टाइगरों की संख्या वहां की कैपेसिटी से अधिक है। ऐसे में वहां से टाइगर का जोड़ा मिलने की अधिक उम्मीद की जा रही है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय भोपाल स्तर पर होगा।
पहले इन्क्लोजर में रहकर नई जगह से होंगे अभ्यस्त, फिर खुले में रहेंगे
टाइगर के सॉफ्ट रिलीज के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व के घोरेला इन्क्लोजर की तर्ज पर माधव राष्ट्रीय उद्यान में भी करीब 5 से 10 हेक्टेयर का इन्क्लोजर बनाया जाएगा। शाकाहारी प्राणियों के लिए 20 से 25 हेक्टेयर का इन्क्लोजर तैयार होगा। इसी तरह का करीब 25 हेक्टेयर का बाड़ा शाकाहारी वन्यप्राणियों के प्रजनन और संख्य वृद्धि के लिए भी बनाया जाएगा। शाकाहारी प्राणियों और टाइगर का यह इन्क्लोजर पास-पास बनाया जाएगा जिसके बीच में एक गेट भी होगा। यहां से शाकाहारी जानवर टाइगर के इन्क्लोजर में जा सकेंगे। फिर टाइगर इनका शिकार कर अपनी भूख शांत कर सकेगा। जब टाइगर नए वातावरण के प्रति अभ्यस्त हो जाएगा तो फिर उसे पूरे क्षेत्र में घूमने के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा।
इनका कहना है
भोपाल में उच्च अधिकारियों की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णल लिए गए थे जिन पर हमारे द्वारा काम भी शुरू कर दिया गया है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द नेशनल पार्क में टाइगर को बसा सकें।
– अनिल सोनी, सहायक संचालक, माधव राष्ट्रीय उद्यान






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