मप्र में परिवहन कार्यालयों में सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी स्मार्ट चिप लिमिटेड के खिलाफ लगाई गई एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा मांगे गए जवाब का तय समय-सीमा में जवाब न देने पर स्मार्ट चिप लिमिटेड पर हाईकोर्ट ग्वालियर की डबल बेंच ने 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है। कॉस्ट की राशि से न्यायालय परिसर को सैनेटाइज किया जाएगा।
ट्रांजेक्शन शुल्क के खिलाफ लगाई याचिका
परिवहन विभाग में स्मार्ट कार्ड बनाने सहित ऑनलाइन सेवाएं देने वाली कंपनी स्मार्ट चिप लिमिटेड के खिलाफ शिवपुरी के विजय शर्मा ने उच्च न्यायालय ग्वालियर में याचिका दायर कर कहा कि कंपनी को जो सेवाएं मुफ्त में प्रदान करनी चाहिए, उनके ऐवज में कंपनी द्वारा घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
इस मामले में हाइकोर्ट की युगल पीठ ने मप्र शासन, परिवहन विभाग, वित्त विभाग ओर स्मार्ट चिप लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, जिस पर मप्र शासन, परिवहन विभाग और वित्त विभाग ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन स्मार्ट चिप लिमिटिड ने अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया था। जनवरी 2021 को हुई सुनवाई में स्मार्ट चिप को जवाब प्रस्तुत करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था। उसके बाद भी स्मार्ट चिप ने जवाब नहीं दिया था।
सितम्बर 2021 को हुई सुनवाई के दौरान स्मार्ट चिप की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया, जिसे मान्य करने के लिए हाइकोर्ट की युगलपीठ ने कंपनी पर 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है।






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