शिवपुरी। पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से शुरू होकर पितृमोक्षम अमावस्या तक चलते हैं। आज अनंद चतुदर्शी पर गणेश जी की विदाई के साथ अगले दिन यानी कल 20 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है, जो कि 6 अक्टूबर को खत्म होगा। पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। देश की प्रमुख जगहों जैसे हरिद्वार, गया आदि जाकर पिंडदा करने से पितृ प्रसन्न हाते हैं, वहीं इन दिनों में कुछ कार्य ऐसे हैं, जिनकी करने की मनाही है।
15 दिन आसपास रहते हैं पितृगण
शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में पितृ 15 दिन तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं। इस दौरान पितृ अपने परिजनों के आसपास रहते हैं। इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहं करना चाहिए जिससे पितृ नाराज हो। ज्योतिषााचार्य राजेश शर्मा ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान शाकाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए। अगर आप नॉनवेज और शराब आदि का सेवन करते हैं, तो इनसे चना चाहिए।
इन कार्यों से नाराज होते हैं पितृ
श्राद्धकर्म करने वाले सदस्यों को इन दिनों बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए। श्राद्ध कर्म हमेशा दिन में करें। सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करना अशुभ माना जाता है। इन दिनों में लोकी, खीरा, चना, जीरा ौर सरसों का साग नहीं ााना चाहिए। जानवरों या पक्षी को सताना या परेशान भी नहीं करना है।
पितृ को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम
पितृ पक्ष में अग कोई जानवर या पक्षी आपके घर आए, तो उसे भोजन जरूर कराना चाहिए। मान्यता है कि पूर्वज इन रूप में आपसे मिलने आते हैं। पितृ पक्ष में पत्तल पर भोजन करें और ब्राह्मणों को भी पत्तल में भोजन कराएं, तो यह फलदायी होता है।
नहीं करें ये शुभ काम
पितृ पक्ष में कोई भी शुभ काम जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, घर के लिए महत्वपूर्ण चीजों की खरीददारी नहीं करें। नए कपड़े या किसी प्रकार की खरीददारी को भी अशुभ माना जाता है। इस दौरान बेहद सादा जीवन जीने औ सात्विक भोजन करने के लिए भी कहा गया है।






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