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जैसे भिकारी के पुण्य का उदय आते ही राजगद्दी को प्राप्त हो जाता है। मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज

खनियाधाना -: खनियाधाना मे पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बडा मन्दिर चल रहे चतुर्मास गणाचार्य मुनि श्री १०८ विराग सागर महाराज जी के शिष्य ओजस्वी वक्ता श्रमण मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज एंव श्रमण मुनि श्री विघेय सागर जी महाराज के सानिध्य मे चलरहे श्री सम्मेद शिखर महामण्डल विधान का समापन के अवसर पर मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज जी ने प्रवचन मे कहा कि माॅ बच्चो को सुशील वनाती है पिता के आचरण से बच्चा चतुर वनता है। बंस के अनुसार बच्चा उदार वनता है। लेकिन पुण्यानुबंधी पुण्य के उदय बह भाग्यवान होता है। माॅ बच्चो सुशील है तो उसकी संतान सुशील होगी पिता सदाचारी है तो बच्चे भी  सदाचारी होगे अधिकांशत: व्यापारी का बेटा व्यापारी एंव कर्मचारी का बेटा कर्मचारी ही वनता है व्यषनो मे फंसे व्यक्ति का बेटा भी  व्यषनो मे लिप्त पाया जाता है। धर्मात्मा का बेटा धर्म मार्ग पर चलने बाला होता है। जिस वंश के दादा पर दादा उदार हृदय थे उनके नानी पोते भी सहृदय दूसरों की मदद मैं आगे बढ़कर भाग लेने वाले होते हैं।  संसार में सब कुछ पुण्य से प्राप्त होता है। पुण्यशाली जहाँ भी जाता है सम्मान को प्राप्त होता है। कब किसका पुण्योदय हो जाय  ओर कब किसका पुण्य क्षीण हो जाए, इसको देवता भी नहीं जानते अच्छे अच्छे राजा महाराजाओं के पुण्य भी क्षीण जिस वंश के दादा पर दादा उदार हृदय थे उनके नानी पोते भी सहृदय दूसरों की मदद मैं आगे बढ़कर भाग लेने वाले होते हैं।  संसार में सब कुछ पुण्य से प्राप्त होता है। पुण्यशाली जहाँ भी जाता है सम्मान को प्राप्त होता है। कब किसका पुण्योदय हो जाय  ओर कब किसका पुण्य क्षीण हो जाए, इसको देवता भी नहीं जानते अच्छे अच्छे राजा महाराजाओं के पुण्य भी क्षीण होते ही सड़क पर जंगलों की खाक को छानते देखा जाता है, तथा पुण्योदय होते ही भिखारी भी राज गद्दी को प्राप्त हो जाता है ऐसे अनेक उदाहरण हम अपने जीवन मे देखते है . ।एक पल में हम अच्छे भले  इंसान के मुत्युशैय्या पर पड़े देखते है उसका सब कुछ यही पीडीए रह जाता है कोई भी दौलत परिजन सेना सरकार उसे बचाने में सक्षम नहीं हुआ। यह हम सब प्रतिदिन देख ऒर सुन रहे है, लेकिन समझ नहीं रहे हैं। अगर समझ जावे तो एक पल भी नही लगेगा हमे सन्मार्गी बनने मैं। देश समाज की सेवा के साथ जरूरत मंदो की शिक्षा स्वास्थ्य एवं खाने पीने की व्यवस्था के लिए हम अपनी यथाशक्ति सहभागी बने।

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