जिम्मेदारों पर लगे लेनदेन के आरोप
शिवपुरी। देशभर में बिल्डर एवं कॉ
लोनाइजरों पर शिकंजा कसने के लिए 1 मई से रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी कानून यानि रेरा को लागू किया गया था। इसके लिए बिल्डर एवं कॉलोनाइजरों को पंजीयन कराने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया। इस दौरान रजिस्ट्रियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी, लेकिन 28 जुलाई से 31 जुलाई तक रजिस्ट्रियां कराने के लिए छूट मिली। इस छूट का कॉलोनाइजरों, बिल्डरों सहित संबंधित अधिकारियों ने भरपूर लाभ उठाया। सूत्रों की मानें तो आम समय में जहां मुश्किल से एक दर्जन के आसपास ही रजिस्टियां हो पाती थी, लेकिन इन छूट के दिनों में सैंकड़ों रजिस्ट्रियां कैसे हो गई इससे रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगते हैं। अपुष्ट सूत्रों की मानें तो यह सब खेल बिल्डरों एवं कॉलेनाइजरों ने विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सांठगांठ कर अंजाम दिया गया है। बताया तो यहां जाता है कि प्रति रजिस्ट्री के ऐवज में चार से पांच हजार रुपए वसूले गए हैं।
प्लॉट व कृषि भूमि की हुई रजिस्ट्रियां
रजिस्ट्रियों पर खुली इस रोक के दौरान रजिस्ट्रार कार्यालय में सैंकड़ों रजिस्ट्रियां हुई इनमें कृषि भूमि, प्लॉट व मकानों की रजिस्ट्रियां हैं, जो रोक के बाद से अटकी हुईं थीं। इसका बिल्डरों और कॉलोनाइजरों ने अधिकारियों से सांठगांठ कर भरपूर फायदा उठाया।
क्या है रियल एस्टेट रेगुलैरिटी एक्ट
रियल एस्टेट रेगुलैरिटी एक्ट (रेरा) के तहत अब नगर निगम, नगरपालिका, नगर परिषद से बिल्डरों को रेरा नंबर लेना होगा। इसके बाद ही वह उक्त जमीन पर प्लॉट या मकान बनाकर बेच सकेंगे। 31 जुलाई के बाद प्लॉट व मकान बेचने वाले बिल्डरों को रेरा नंबर लेना अनिवार्य है, इसके बाद ही वह रजिस्ट्री करा सकेंगे।
कृषि भूमि को बिना डायवर्सन के बेच रहे थे कालोनाइजर
शहर में कई स्थानों पर प्लॉट बेचने का क्रम जारी है। कालोनाइरों के द्वारा सीधे कृषि भूमि को खरीदकर उस पर महज मुरम व गिट्टी की सड़क बिछाकर प्लॉटिंग कर दी जाती थी, लेकिन रेरा के आने के बाद अब कालोनाइजरों को रेरा नंबर तो लेना ही होगा, साथ ही कृषि भूमि का डायवर्सन भी कराना होगा, तभी वह प्लॉट बेच सकेंगे।
खेती की जमीन भी 5 विस्वा से ज्यादा नहीं बेच पाएंगे किसान
रेरा एक्ट के लागू होने के बाद अब किसान भी अपनी खेती की जमीन को 5 विस्वा से अधिक नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि पहले कालोनाइजर किसानों से बीघा में रजिस्ट्री या एग्रीमेंट कराकर उन पर प्लॉट काट देते थे, लेकिन अब किसान यदि 5 विस्वा से अधिक जमीन बेचता है तो उसे भी रेरा नंबर लेना अनिवार्य है।
यह होगा उपभोक्ता को फायदा
रेरा एक्ट के लागू होने के बाद उपभोक्ता को फायदा होगा। उपभोक्ता यदि बिल्डर को अपने मकान के लिए जो राशि देता है और यदि समय सीमा में उसका निर्माण पूरा नहीं होता है तो बिल्डर को ब्याज सहित उसकी राशि का भुगतान करना होगा। यदि बिल्डर रेरा के नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसे सजा का प्रावधान है।






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