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1832 आंगनबाड़ी नहीं हो सकीं पेपरलेस

1832 आंगनबाड़ी नहीं हो सकीं पेपरलेसकार्यकर्ताओं के मोबाइल में डाउनलोड साफ्टवेयर कॉम केयर जीपीआरएस से कनेक्ट
रहेगा और इसके जरिए दिल्ली की एक सेल पूरी जानकारी पर नजर रखेगी। अपलोड
होने वाली पूरी जानकारी भोपाल दिल्ली में शो होनी थी। लेकिन आंगनबाड़ी
केंद्र पेपरलेस नहीं होने व कार्यकर्ताओं द्वारा एंड्रॉयड फोन में
सॉफ्टवेयर डाउनलोड न करने से जीपीआरएस सिस्टम से भी कोई निगरानी नहीं हो पा
रही है।
 फैक्ट फाइल

जिले में आंगनवाड़ी केंद्र 1832

मिनी केंद्र 425

कार्यकर्ताओं की संख्या 2257

सहायिका की 2257

शोपीस बने कार्यकर्ताओं को मिले फोन

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार द्वारा केंद्रों को पेपर लेस बनाने व
उनकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग करने के उद्देश्य से दिए गए फोन अब शोपीस बने हुए
हैं। क्योंकि न तो केंद्र पेपर लेस हुए हैं और न ही फोन में कोई सॉफ्टवेयर
डाउनलोड न होने के चलते अब भोपाल से केंद्रों की मॉनीटरिंग भी नहीं हो पा
रही है। जिसके चलते मोबाइल अब शोपीस बने हुए हैं।

बच्चों ने खराब कर दिए अधिकांश फोन

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार द्वारा पेपरलेस करने दिए गए एंड्रॉयड
फोन को अधिकांश केंद्रों की कार्यकर्ताओं के फोन खराब हो गए है। जिनसे अब
खराब फोन से उनके बच्चे खेलते नजर आ रहे है। जबकि इन फोन को देने के पीछे
सरकार का उद्देश्य मॉनिटरिंग व पेपरलेस करना था।

नही हो पा रही कागज की बचत

पेपरलेस आंगनबाड़ी हो जाने से हर माह प्रत्येक केंद्र पर उपयोग
में आने वाले हाजरी रजिस्टर व प्रसूति टीकाकरण रजिस्टर, किशोरी बालिकाओं को
की संख्या रजिस्टर, बच्चों की प्रतियोगिताओं व वजन सहित अन्य गतिविधियों
को मेंटेन करने के रजिस्टरों के रूप में उपयोग होने वाले रजिस्टरों से
कागजों की बड़ी संख्या में बचत होती। लेकिन आंगनबाड़ी पेपरलेस नहीं होने से
अब ये कागज की बचत नहीं हो पा रही है। वहीं शासन द्वारा प्रशिक्षण में खर्च
किए गए पैसे भी फिजूल खर्च हो गए हैं।

अप्रैल माह में दिया जा चुका है प्रशिक्षण

महिला बाल विकास करैरा परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर ने बताया
है की इंफॉर्मेशन कम्युनिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी सूचना संचार प्रणाली के तहत
महिला बाल विकास परियोजना के अंतर्गत 250 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को
प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसी प्रकार जिले की सभी 1832 केंद्रों की
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह प्रशिक्षण कार्यकर्ताओं को दो सेक्टर में
दिया जा चुका है। जिसका पहला सेक्टर 1 अप्रैल को खत्म हो गया था और दूसरे
सेक्टर में ग्रामीण के केंद्र शामिल किए गए थे। वह भी 5 अप्रैल को खत्म हो
गया था।

करैरा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर कागजों में लिखा-पढ़ी करतीं सदस्य।

शोपीस बने कार्यकर्ताओं के एंड्रॉयड फोन

भास्कर संवाददाता | करैरा

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को
शामिल किया गया था। इससे जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को पेपरलेस करने
के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एंड्रॉयड मोबाइल वितरित किए गए थे। साथ
ही उनके ऑनलाइन उपस्थित सहित सभी रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर में सेव करने के तरीके
सिखाए गए थे। जिससे केंद्रों पर उपयोग होने बोले रजिस्टरों सहित अन्य कागज
की बचत होकर सभी केंद्र पेपरलेस हो सके।

जिसके लिए प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण देकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं
को एंड्रॉयड मोबाइल में कार्य करना सिखाया गया था। लेकिन प्रशिक्षण के 4
माह से अधिक समय हो जाने के बाद भी जिले की आंगनबाड़ी केंद्र पेपरलेस नहींं
हो सके हैं और न ही जीपीआरएस सिस्टम के तहत केंद्रों की कोई निगरानी भोपाल
से हो पा रही है।

फोन और कागज दोनों में हो रहा है कार्य

आंगनवाड़ी
कार्यकर्ता फोन और कागज दोनों में कार्य करती हैं। क्योंकि फोन कभी खराब
हो जाए तो रिकॉर्ड रजिस्टरों में सुरक्षित रह जाता है। जीपीआरएस से निगरानी
भी होती है और ऑनलाइन उपस्थिति भी लगती है। ओपी पांडे, जिला महिला बाल
विकास अधिकारी शिवपुरी

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