जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के बागी रुख के बाद बिहार केमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि वह
अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं. हमने जो भी फैसला लिया है पूरी
पार्टी से विचार विमर्श करने के बाद ही लिया है. हालांकि शरद यादव पर पर
कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया.
मोदी से भी की मुलाकात
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
से मुलाकात की. नीतीश कुमार का कहना है कि वह प्रधानमंत्री मोदी से बाद
में अगस्त के आखिरी में आकर के बिहार के मुद्दों पर बात करेंगे. वहां के
विकास योजनाओं पर प्रधानमंत्री से बातचीत करेंगे. उन्होंने कहा कि आज सिर्फ
औपचारिक मुलाकात थी.
से मुलाकात की. नीतीश कुमार का कहना है कि वह प्रधानमंत्री मोदी से बाद
में अगस्त के आखिरी में आकर के बिहार के मुद्दों पर बात करेंगे. वहां के
विकास योजनाओं पर प्रधानमंत्री से बातचीत करेंगे. उन्होंने कहा कि आज सिर्फ
औपचारिक मुलाकात थी.
निकाल रहे हैं यात्रा
बता दें कि बीजेपी के साथ गठबंधन किए जाने के बाद से
बगावती तेवर अपनाए जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव तीन दिनों की बिहार
यात्रा पर पटना में हैं. उन्होंने यात्रा के पहले
दिन कहा था कि वह नीतीश कुमार के इस फैसले से आहत हैं और इसीलिए लोगों के
बीच जाकर उनसे बात करेंगे. वहीं उनकी पार्टी जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने
भी दो-टूक शब्दों में मर्यादाओं का पालन करते हुए संयम बरतने को कहा है.
बगावती तेवर अपनाए जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव तीन दिनों की बिहार
यात्रा पर पटना में हैं. उन्होंने यात्रा के पहले
दिन कहा था कि वह नीतीश कुमार के इस फैसले से आहत हैं और इसीलिए लोगों के
बीच जाकर उनसे बात करेंगे. वहीं उनकी पार्टी जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने
भी दो-टूक शब्दों में मर्यादाओं का पालन करते हुए संयम बरतने को कहा है.
शरद यादव ने कहा था, ‘हमने पांच साल के लिए किया गठबंधन
किया था. जिस 11 करोड़ जनता से हमने जो करार किया था, वो ईमान का करार था.
वो टूटा है, जिससे हमको तकलीफ हुई है.’ शरद यादव ने साथ ही कहा कि 70 साल
के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहां दो पार्टी या गठबंधन जो
चुनाव में आमने-सामने लड़े हों और जिनके मेनिफेस्टो अलग-अलग हों, दोनों के
मेनिफस्टो मिल गए हों. उन्होंने कहा कि यह लोकशाही में विश्वास का संकट है.
किया था. जिस 11 करोड़ जनता से हमने जो करार किया था, वो ईमान का करार था.
वो टूटा है, जिससे हमको तकलीफ हुई है.’ शरद यादव ने साथ ही कहा कि 70 साल
के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहां दो पार्टी या गठबंधन जो
चुनाव में आमने-सामने लड़े हों और जिनके मेनिफेस्टो अलग-अलग हों, दोनों के
मेनिफस्टो मिल गए हों. उन्होंने कहा कि यह लोकशाही में विश्वास का संकट है.





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