एक्टर नवाजु़द्दीन सिद्दीकी ने हाल में ही में रंग भेद को लेकर बयानदिया था। नवाज़ बताते हैं कि यह सच है कि लोगों के जेहन में अब भी रंग को
लेकर भेदभाव बहुत है।
उन्होंने स्वीकारा है इस इंडस्ट्री में शुरुआती
दौर में उन्होंने परेशानी झेली है। नवाज़ अपने बचपन की बातों को याद करते
हुए कहते हैं कि वे जिस स्थान से संबंध रखते हैं, वहां उन्हें रंग को लेकर
कई बार ताने सुनने पड़ते थे।
नवाज़ बताते हैं ‘बचपन में भी आस-पड़ोस के
लोग कहते थे कि अरे तू तो काला है। उस वक्त समझ नहीं थी मुझे। मैं खुद
चाहता था कि मैं गोरा बन जाऊं। मैं हमेशा मार्केट से जाकर गोरे होने वाली
क्रीम खरीद कर ले आता था और उसे चेहरे पर घिसा करता था। मजे की बात तो यह
है कि वह क्रीम भी सही फेयरनेस क्रीम नहीं बल्कि नकली वाली फेयरनेस क्रीम
होती थी जो काफी सस्ते में मिलती थी और मैं विज्ञापन देख कर ले आता था।
लेकिन फिर भी कभी गोरा नहीं होता था। उस समय बहुत तकलीफ भी होती थी। जब बड़ा
हुआ और लोगों से मिलने लगा। लोगों ने मेरे काम की सराहना शुरू की तो मुझे
ये बात समझ में आई कि दरअसल, लोग चेहरे को नहीं, काम को अहमियत देते हैं।
तब जाकर मेरा अपना कॉन्फिडेंस बढ़ा और मैंने इस बात को अच्छी तरह समझा कि
आपका काम बोलता है आपका रंग नहीं। मैंने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि
मुझे अपने काम से आत्मविश्वास लाने की कोशिश करनी चाहिए न कि अपने चेहरे से
और अब वह हुआ भी। मैं खुश हूं कि अब लोगों ने मेरे काम से पहचानना शुरू
किया।’
लोगों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि मेरा रंग कैसा है।
नवाजु़द्दीन बताते हैं कि शुरुआती दौर में उन्हें इंडस्ट्री में परेशानी
होती थी और वैसे किरदार मिलते थे। लेकिन बाद में तो लोगो ने मेरे काम को
ही तवज्जू देना शुरू किया। नवाज बताते हैं इसके बावजूद जब इस तरह के भेदभाव
अब भी होते हैं तो काफी तकलीफ होती है।





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