डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी और अस्पताल में नहीं आने के
कारण बनी है। इन अस्पतालों से जुड़े 94 गांव के लोगों को समय पर स्वास्थ्य
सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना
पड़ रहा है।
माता के बीलवारा निवासी राकेश जाटव, अनार सिंह रावत तथा जौराई गांव के
कमलेश तथा सोनेराम आदि ने बताया कि तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित
उपस्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थ स्वास्थ्य कार्यकर्ता व एएनएम अपने
मुख्यालय पर निवास न करते हुए बैराड़, शिवपुरी अपने घरों पर रहते हैं और
झूठी उपस्थिति दर्शाकर वेतन प्राप्त किया जा रहा है। जबकि बीमार
ग्रामवासियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर
पदस्थ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का महीने में एक-दो बार ही आना होता जो कुछ
देर की खानापूर्ति के बाद वह अपने घरों की ओर वापस हो लेते हैं। गांवों
संचालित उप स्वास्थ्य केंद्रों के बंद रहने से गांव के बीमार लोगों इलाज
समय पर नहीं हो पा रहा। अस्पताल बंद रहने से गांव की महिला मरीज भारी
परेशान हैं, उन्हें व उनके परिजनों को मजबूरीवश उन्हें झोलाछाप डॉक्टरों का
सहारा लेने को विवश होना पड़ रहा है।
बैराड़ क्षेत्र के अनेक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत खस्ता है। तहसील के
गोदरी, जोराई, केमई, नदोरा, ककरौआ, गोवर्धन, ऐचवाडा, माता का बीलबरा,
बूडदा, खटका, गाजीगढ़, भदेरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र अक्सर बंद रहते हैं।
वहीं नदौरा, ऐचवाडा, गोदरी, खटका, बूढ़दा के उपस्वास्थ्य केंद्रों पर
दबंगों ने अपना कब्जा जमा रखा है, जिनका उपयोग पशु बांधने तथा घर का सामान
रखने में किया जा रहा है। जिम्मेदारों के ध्यान न देने से उपस्वास्थ्य
केंद्रों की हालत खराब होती जा रही है।
उप स्वास्थ्य केंद्र बीलबरा में लोगों को नहीं मिल पा रहा स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ।
आदिवासी ग्रामों में फैल रही मौसमी बीमारी
बैराड़ तहसील क्षेत्र के आदिवासी ग्रामों में इन दिनों मौसमी
बीमारियों का प्रकोप है। क्षेत्र के गोवर्धन, गणेशखेड़ा, कैमरखेड़ी, कैमरारा,
पिपलौदा, मानिकपुर गांव की आदिवासी बस्ती में मौसमी बीमारियां फैल गई हैं।
ग्रामीण गोपीलाल , धनीराम आदिवासी, बद्री आदिवासी, कल्याण और पीतम आदिवासी
ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र बंद रहने से ग्रामीणों को शासन की
स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
गांव का अस्पताल रहता है बंद, जाना पड़ता है बैराड़
हमारे
गांव का अस्पताल अक्सर बंद रहता है। अस्पताल में पदस्थ नर्स महीने, दो
महीने में एकाद बार ही आती हंै। हमें इलाज कराने बैराड़ जाना पड़ता है।
जिला एवं विकासखंड के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी भी इन केंद्रों की कोई खबर
नहीं लेते हैं। इस स्थिति में अस्पताल अिधकांश दिन बंद ही रहता है। खास बात
यह है कि इसकी जानकारी अिधकारियों को भी है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया
जा रहा है। इस स्थिति में ग्रामीणों को समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा
रही है। शिशुपाल रावत, निवासी माता का बीलवरा
मैं जल्द ही भ्रमण कर केंद्रों की स्थिति देखंूगा
मैं
शीघ्र ही क्षेत्र का भ्रमण कर उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति देखूंगा।
बंद मिलने वाले उपस्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थ एएनएम तथा एनपीडब्ल्यू के
खिलाफ कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा जाएगा। इसके अलाव कई
बीलबरा पर गांव के रसूखदारों ने कब्जा कर लिया है। जिनकी हमने वरिष्ठ
अधिकारियों सूचना दे दी है। जिन्हें जल्द ही दुरुस्त कराकर चालू कराया
जाएगा। पवन कोरकू, बीएमओ पोहरी





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