मल्टीमीडिया डेस्क। ट्रिपल तलाक पर ऐतिहासिक फैसला
देते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। मुस्लिम
महिलाएं लंबे समय से इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रही थीं। वहीं यूपी विधानसभा
चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह मुद्दा उठाते हुए आधी
आबादी को बराबरी का हक देने की बात कही थी।
अब सुप्रीम कोर्ट ने
केंद्र सरकार को छह माह का समय दिया, ताकि वह इस संबंध में कानून बनाकर
संसद में पेश करे। यानी ट्रिपल तलाक से मुस्लिम महिलाओं को पूरी तरह आजादी
मिलेगी या नहीं, अब यह फैसला केंद्र की मोदी सरकार के हाथों में है। सवाल
उठता है कि क्या मोदी सरकार को इसका फायदा मिलेगा? पढ़ें क्या कहते हैं
, ‘इस फैसले से मोदी सरकार का फायदा ही फायदा है। इस
सरकार ने अदालत में कह दिया था कि वह तीन तलाक के खिलाफ है। 15 अगस्त को
लाल कीले से भाषण में मोदी ने यह बात कही कि ट्रिपल तलाक प्रथा गलत है।
मेरी समझ में यह सरकार का पहला कदम है। अभी मोदी सरकार कई सामाजिक और
धार्मिक सुधार लागू करने जा रही है। इसी राह पर चलते हुए भाजपा को जो नारा
है, यूनिफॉर्म सिविल कोड वो आकर रहेगा।’
वहीं, मप्र कांग्रेस
प्रवक्ता केके मिश्रा का मानना है, ‘ऐसे सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों
को राजनैतिक आधार पर लाभ अथवा हानि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समाज
व्यापकतौर पर लाभान्वित होता है तो इसके राजनीतिक मायने निकालना अनुचित
होगा। यह फैसला मानवता के नाते उचित है।’
इसी
तरह, संघ से जुड़े अनिल सौमित्र कहते हैं, ‘यह चुनावी मुद्दा नहीं है।
वैसे भी यह केस लंबे समय से चल रहा है। यह बात भी सही है कि जब से केंद्र
में यह सरकार बनी है, तब से इसकी चर्चा ज्यादा हो गई थी। खासतौर पर पिछले
छह माह में। यह मुद्दा भाजपा या संघ ने तो उठाया नहीं है। यह विषय मुस्लिम
समाज की महिलाओं ने ही उठाया है। एक बात यह भी है कि जैसे हम कहते हैं कि
हिंदू समाज में सती प्रथा जैसी कुरीति से राजाराम मोहन राय ने आजादी दिलाई
थी, इसी तरह मौजूदा भाजपा नेतृत्व को इसका श्रेय मिलता है कि उन्होंने एक
संप्रदाय विशेष की महिलाओं को अधिकार दिलाया है। लेकिन आगे चलकर इसका
राजनीतिक फायदा होगा या नहीं, यह अनुमान अभी से नहीं लगाया जा सकता।’





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