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जनरल से भी बदतर हुआ एसी का सफर, पानी को भी तरसे यात्री

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ग्वालियर। समय दोपहर 3 बजे। कहने को थर्ड एसी कोच
लेकिन गर्मी से बेहाल यात्री। जनरल कोच से भी बदतर हालात, क्योंकि करीब 6
घंटे से एसी नहीं चल रहे थे। गर्मी के कारण स्थिति यह हो गई कि यात्रियों
को घुटन तक होने लगी। पूरी ट्रेन एसी लेकिन एक भी कोच में पानी नहीं,
यात्री दैनिक क्रिया तक के लिए परेशान हो गए क्योंकि पानी खत्म हो चुका था।
पेंट्री कार में पीने के पानी की बोतलें और खाने का सामान तक खत्म हो चुका
था। हर यात्री खाने और पीने के पानी को भी तरस रहा था। जनरेटर कार का डीजल
खत्म हो चुका था।
यह नजारा बुधवार को ग्वालियर रेलवे स्टेशन के
प्लेटफॉर्म-4 पर खड़ी गोरखपुर-आनंदबिहार टर्मिनल हमसफर एक्सप्रेस (12595) का
था। जिसमें हजारों स्र्पए खर्च कर आरामदायक सफर के लिए महीनों पहले आरक्षण
कराने वाले यात्री कष्ट भरा सफर करने को मजबूर थे। कारण था कैफियत
एक्सप्रेस के बेपटरी होने की वजह से कई ट्रेनों को डायवर्ट किया जाना।
ट्रेनों को अलग-अलग रूटों से डायवर्ट किया गया। 26 ट्रेनों को कानपुर से
झांसी-ग्वालियर-आगरा होते हुए दिल्ली निकाला गया।
कानपुर-झांसी सिंगल
ट्रेक है इसलिए ट्रेनों को घंटों बीच में रोक-रोककर निकाला गया। इस वजह से
ट्रेनें घंटों रास्ते में खड़ी रहीं। रास्ते में खड़े रहने की वजह से
ट्रेनों के एसी कोच की बैट्री खत्म हो गई और बैट्री खत्म होने की वजह से
एसी चलना बंद हो गए। क्योंकि ट्रेन जब खड़ी होती है तो बैट्री से एसी और
बिजली के उपकरण चलते हैं।
वहीं जब ट्रेन पटरियों पर दौड़ती है तो
पहियों में लगे डायनेमो के घूमने से ऊर्जा बनती है और इसी से एसी व अन्य
उपकरण चलते हैं। क्योंकि बुधवार को हमसफर एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनें
रास्ते में घंटों खड़ी रही तो बैट्री खत्म हो गई, जिसके चलते एसी का सफर
सबसे ज्यादा कष्ट भरा बन गया। यात्रियों ने जगह-जगह हंगामा किया, लेकिन
स्टाफ भी मजबूर था।
बिगड़ी तबियत
– हमसफर
एक्सप्रेस के बी-6 कोच में सवार रजत कुमार उम्र 67 वर्ष के बेटे उदित ने
बताया कि उनके पिता किडनी मरीज हैं। सफर में परेशानी न हो इसलिए उन्होंने
हमसफर एक्सप्रेस में एक महीने पहले रिजर्वेशन करवाया था। लेकिन इसके बाद यह
स्थिति बन गई, जिसके चलते उनकी तबियत बिगड़ गई। गेट के पास वाली सीट पर
उन्हें बिठाया और गेट हाथ से पकड़कर रखा।
– पुस्र्षोत्तम एक्सप्रेस
ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर दोपहर में मेन लाइन पर सिग्नल के इंतजार में खड़ी
थी। इसके एस-7 कोच में सवार अजीत रंजन ने बताया कि पूरी ट्रेन में पानी
नहीं है। रास्ते में पेंट्री कार में भी पानी खत्म हो गया। खाने का सामान
पेंट्री कार में खत्म हो गया। ग्वालियर के पास ट्रेन स्र्की तो वेंडरों ने
पानी की बोतल, खाने के सामानों पर मनमाने दाम वसूले। मजबूरी में हमें लेना
पड़ा।
– फरक्का एक्सप्रेस के ए-1 कोच में सवार विश्रुत त्रिपाठी ने
बताया कि ट्रेन माणिकपुर के पास दो घंटे खड़ी रही। इसके बाद झांसी और आधा
घंटे से ग्वालियर में खड़ी है। एसी सुबह से बंद हैं। गर्मी में सफर मुश्किल
हो गया है। कोच अटेंडर का कहना है कि एसी नहीं चल पाएंगे क्योंकि बैट्री
खत्म हो गई है।
– फरक्का एक्सप्रेस के ए-1 कोच में ही सवार सुरेश
यादव ने बताया कि खाने तक के लिए सुबह से परेशान हैं। पेंट्री कार में सुबह
10 बजे ही पूरा खाना खत्म हो गया। पानी खत्म हो गया। रेलवे स्टेशन पर हर
सामान महंगा मिल रहा है।
यह ट्रेनें निकाली ग्वालियर से
12403- इलाहबाद-जयपुर एक्सप्रेस
12802- पुस्र्षोत्तम एक्सप्रेस
12582- नई दिल्ली-मडुआडीह एक्सप्रेस
12874- झारखंड स्वर्णजयंती एक्सप्रेस
12556- गोरखधाम एक्सप्रेस
13413- फरक्का एक्सप्रेस
12595- गोरखपुर आनंदबिहार हमसफर एक्सप्रेस
12393- संपूर्णक्रांति एक्सप्रेस
12581- मडुआडीह नई दिल्ली एक्सप्रेस
12329- पश्चिम बंगाल संपर्क क्रान्ति
12401- मगध एक्सप्रेस
13007- उद्यान-आभा तूफान एक्सप्रेस
12398- नई दिल्ली-गया एक्सप्रेस
18101- टाटानगर-मूरी एक्सप्रेस
12311- हावड़ा-दिल्ली कालका मेल
12452- नई दिल्ली-कानपुर श्रमशक्ति एक्सप्रेस
12307- हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस
12164- मेरठ-इलाहबाद संगम एक्सप्रेस
12350- नई दिल्ली-भागपुर एक्सप्रेस
12562- नई दिल्ली-जयानगर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस
18102- जम्मू-टाटानगर एक्सप्रेस
12312- हावड़ा कालका मेल
12826- झारखण्ड एक्सप्रेस
12816- नई दिल्ली-पुरी नंदन कन्या एक्सप्रेस
ग्वालियर आने वाली ट्रेनों पर भी पड़ा असर
ट्रेनों
के डायवर्ट होने की वजह से ग्वालियर आने वाली ट्रेनों पर भी खासा असर पड़ा।
सबसे ज्यादा प्रभावित दिल्ली से आने वाली ट्रेनें हुईं। ग्वालियर आने वाली
सचखंड एक्सप्रेस 1.23 घंटे, उत्कल एक्सप्रेस 1 घंटे, मंगला एक्सप्रेस 1.10
घंटे, हीराकुंड एक्सप्रेस 1.30 घंटे, निजामुद्दीन एक्सप्रेस 1.20 घंटे,
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस 1 घंटे, पंजाब मेल 1.10 घंटे देर से ग्वालियर पहुंची।
रहेगा असर
कैफियत
एक्सप्रेस हादसे के बाद शाम तक ट्रैक क्लियर नहीं हो पाया था। इस वजह से
शाम को जो ट्रेनें वहां से रवाना होती हैं, वह रवाना नहीं हो सकीं। इन्हें
डायवर्ट रूट से निकाला जाएगा तो गुस्र्वार को भी यही स्थिति रहेगी।

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