भोपाल। एक गर्भवती महिला को बेहोशी का इंजेक्शन(स्पाइनल एनेस्थिसिया) लगाने के बाद डॉक्टर निडिल निकालना ही भूल गए। महिला
17 घंटे तक दर्द से तड़पती रही। लेकिन परिजन और ड्यूटी डॉक्टर निडिल के
कारण उठ रहे दर्द को ऑपरेशन से उठने वाला दर्द मानकर उसे तसल्ली देते रहे।
जब
महिला को दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया तो उसे पलटाया गया। तब जाकर पता
चला कि दर्द की वजह रीढ़ की हड्डी में फंसी दो से ढ़ाई इंच लंबी निडिल है। यह
देख ड्यूटी डॉक्टर, स्टॉफ नर्स और महिला के परिजन भौचक रह गए।
शुक्र
है कि महिला के साथ अभी तक कोई अनहोनी घटना नहीं हुई। आमतौर पर रीढ़ की
हड्डी के साथ इस तरह के खिलवाड़ से मरीज के पैरालाइसिस होने का खतरा रहता
है। महिला की जान के साथ खिलवाड़ करने वाला यह गंभीर मामला राजधानी के
सुल्तानिया जनाना अस्पताल का है।
जहां गर्भवती महिला को पेट में दर्द
के बाद भर्ती कराया था। जांच के बाद बच्चा नली में फंसा मिला था जिसे सीजर
कर निकाला गया। सीजर के लिए एनेस्थिसिया के डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया था।
एक सप्ताह में दूसरी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा शरद
जैन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है।
सुल्तानिया
जनाना अस्पताल में बुधवार दोपहर 2 बजे पंचशील नगर बंगाली कॉलोनी की राखी
पत्नी धर्मेंद गन्नोते (23) को भर्ती कराया था। दर्द बढ़ने पर डॉक्टरों ने
ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। शाम 4 बजे उसे ओटी में शिफ्ट किया, 2 घंटे
ऑपरेशन चला, 6 बजे उसे बाहर निकाला गया। राखी को आईसीयू में शिफ्ट किया।
होश
में आते ही वह लगातार पीठ में तेज दर्द की शिकायत करती रही, लेकिन डॉक्टर
ने हिलने से मना किया था। इसलिए पूरी रात दर्द से तड़पती रही। परिजनों ने भी
एक बात नहीं सुनी। राखी की मां रेखा जाटव ने बताया कि सुबह 9 बजे डॉक्टर
और नर्स के कहने पर जब राखी को पलटाया गया तो उसकी रीढ़ की हड्डी में निडिल
मिली। जिसे निकाला गया।
आपस में लड़ने लगे थे डॉक्टर, नर्स
रेखा
जाटव का कहना है कि निडिल मिलने से डॉक्टरों में अफरा-तफरी मच गई। सभी
राखी को देखने आए। लेकिन एक डॉक्टर (नाम नही जानती) का कहना था कि यह
इंजेक्शन उसने नहीं लगाया। बल्कि नर्सा ने लगाया होगा। जबकि निडिल रीढ़ की
हड्डी में मिली थी जहां एनेस्थिसिया का ही इंजेक्शन लगता है। एनेस्थिसिया
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही है। यदि निडिल अंदर टूट जाती
या महिला के हिलने-ढुलने से कहीं और चुब जाता तो पैरालाइसिस होने का खतरा
था।
सुल्तानिया के हाल: एक सप्ताह में ये बड़ी लापरवाही
31 अगस्त 2017 : खून
चढ़ाने के लिए भर्ती सूखी सेवनिया निवासी महिला मुस्कान वंशकार ने टॉयलेट
में नवजात को जन्म दिया। ड्यूटी डॉक्टर ने महिला के साथ अभद्रता भी की। बाद
में नवजात को हमीदिया रेफर किया, जहां उसकी मौत हो गई।
07 सितंबर 2017 :
गैस राहत कमिश्नर कृष्णगोपाल तिवारी ने अस्पताल का निरीक्षणा किया। कई
गंभीर लापरवाही मिली, जिसमें एक पलंग पर दो-दो महिलाओं को भर्ती करना, ठीक
से इलाज नहीं करना आदि। जिस पर फटकार लगाई।
मामला गंभीर, जांच कराऊंगा
महिला
की रीढ़ की हड्डी में डॉक्टर द्वारा निडिल छोड़ने का मामला बेहद गंभीर है।
इसकी जांच कराई जाएगी। जो दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई करेंगे। –
शरद जैन, मंत्री चिकित्सा शिक्षा, मप्र





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