
नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने और सुरक्षित ऑनलाइन सामग्री तक उनकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में जो कुछ भी हो रहा है, वह नगण्य है. यूनिसेफ ने ‘स्टेट ऑफ वर्ल्डस चिल्ड्रन 2017 : चिल्ड्रन इन ए डिजिटल वर्ल्ड’ नाम से जारी एक रिपोर्ट में बताया कि दुनियाभर में हर तीसरा इंटरनेट उपयोगकर्ता बच्चा है. दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की संख्या एकतिहाई है. भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक अच्छी हो या बुरी, लेकिन यह हमारी जिंदगी की नहीं बदलने वाली हकीकत बन गई है. उन्होंने कहा कि बच्चे इस डिजिटल दुनिया में जहां अपने ज्ञान के बढ़ा रहे हैं वहीं, इस दुनिया के अपने अलग खतरे हैं. यह हमारे सामने चुनौती है कि हर बच्चे को इंटरनेट के अधिकतम फायदे मुहैया करवाने के क्रम में खतरों को कैसे कम कर सकते हैं.
डॉ. यास्मीन ने बताया कि रिपोर्ट में डिजिटल तकनीक के फायदों की पड़ताल की गई है. इसमें उन बच्चों को भी शामिल किया गया है जो अभी इस तकनीक के इस्तेमाल से दूर हैं. ऐसे बच्चों को नवीनतम सूचनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना, उनमें डिजिटल वर्कप्लेस के मुताबिक क्षमता निर्माण करना और उनको संपर्क व अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए मंच प्रदान करना शामिल है.






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