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इंदौर बस हादसा: मृत ड्राइवर के घर 5 दिन पहले जन्मी थी बच्ची,


इंदौर । हादसे में मृत स्वस्तिक पंड्या (10) छठी का

छात्र है। पिता भोलेनाथ पंड्या ओडीसा में निजी कंपनी में ऑफिसर व मां निजी स्कूल में टीचर है। स्वस्तिक की बड़ी बहन भी डीपीएस में 8वीं में पढ़ती है। शुक्रवार को उसकी बस छूट गई थी। शाम को वह भाई का इंतजार कर रही थी, लेकिन पांच बजे उसकी मौत की खबर मिली। पुलिस ने बॉम्बे हॉस्पिटल से शव को पीएम के लिए रवाना किया तो उसका जूता और टाई शव से लिपटे थे। परिजन ने आंखें दान करने का फैसला लिया है।

मन्नतों से 25 साल बाद हुई थी बेटी 
हादसे में मृत श्रुति लुधियानी पहली में पढ़ती है। पिता घनश्यामदास (खातीवाला टैंक) सियागंज के चाय कारोबारी हैं। चाचा मोहन लुधियानी के मुताबिक भाई को 25 साल तक संतान नहीं हुई थी। मन्नतों के बाद श्रुति हुई थी। वह रोज 4.30 बजे के आसपास घर पहुंच जाती थी। स्कूल के बजाय सोशल मीडिया और कॉलोनी के अन्य लोगों से खबर मिली की डीपीएस की बस का एक्सिडेंट हुआ है। लुधियानी ने बेटी की आंखें और त्वचा दान की है।
… ताकि मेरी बेटी दूसरे बच्चे में जिंदा रहे 
8वीं में पढ़ने वाली कृति को हादसे में खोने के बाद पिता प्रशांत अग्रवाल (खातीवाला टैंक) ने सेवा भारती संस्था की मदद से उसकी आंखें दान की ताकि बेटी दूसरे बच्चे में जिंदा रहे। अग्रवाल का लोहामंडी में कारोबार है। उन्होंने भी स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया कि हादसे की उन्हें सूचना तक नहीं दी गई। मौसा दीपक बागड़ी के मुताबिक परिवार अन्य अंग भी दान भी करना चाहता था लेकिन पीएम में देरी के कारण हो नहीं सका।
बेटी का शव देखते ही बदहवास हो गए 
परिजन 9 वर्षीय हरमीत कौर उर्फ खुशी (खातीवाला टैंक) के पिता गुरजीतसिंह ट्रैवल्स संचालक हैं। उनका बड़ा बेटा सहजवीर है। चाचा राजेंद्र के मुताबिक बच्ची तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। कॉलोनी के कई बच्चे साथ जाते थे। शाम को उन्हें भी एक-दूसरे से ही घटना का पता चला था। पहले बॉम्बे अस्पताल में बच्ची को तलाशते रहे। बाद में पता चला खुशी की मौत हो चुकी है। शव एमवायएच में रखा है। पिता बेटी का शव देख बदहवास हो गए।
भाई और भानजे ने कहा खटारा हो गई थी 
बस हादसे में मृत बस चालक राहुल सिसोदिया की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी ईशा ढाई साल की है, जबकि दूसरी पांच दिन पहले ही हुई। भाई धर्मेंद्र व भानजे मनोज पंवार के मुताबिक बस खटारा हो चुकी थी। राहुल ने बस इंचार्ज से कई बार शिकायत की थी लेकिन उन्होंने कहा कि अभी चलाते रहो। एक वर्ष पूर्व तक मनोज भी इसी स्कूल की बस चलाता था। उसके सामने ही बस बदलने की शिकायत की गई थी।
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