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भाजपा से टिकिट के प्रबल दावेदार भारती के मुकाबले कांग्रेस में धाकड़ उम्मीदार उतारने पर मंथन

पिछले दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ब्राहमण उम्मीदवार हो रहे हैं पराजित 

शिवपुरी। पिछले विधानसभा चुनाव तक पोहरी जिले का एक मात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र था जहां से कोई भी प्रत्याशी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीता, लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा के विधायक प्रहलाद भारती ने इस मिथक को झुठलाते हुए लगातार दूसरी बार विजयश्री हासिल करने में सफलता प्राप्त की। श्री भारती ने 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में दोनों बार कांग्रेस के ब्राहमण उम्मीदवारों को पराजित किया। पिछोर के जातिगत गणित को देखते हुए भाजपा के धाकड़ प्रत्याशी के मुकाबले कांग्रेस ने ब्राहमण उम्मीदवार को टिकट दिया, लेकिन दोनों बार उसे सफलता प्राप्त नहीं हो पाई। इस कारण सूत्र बताते हैं कि इस बार कांग्रेस कांटे से कांटा निकालने की जुगत में है और प्रहलाद भारती के मुकाबले धाकड़ उम्मीदवार उतारे जाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। कांग्रेस का सकारात्मक पक्ष यह है कि भाजपा में धाकड़ उम्मीदवार के रूप में अकेले प्रहलाद भारती हैं जबकि कांग्रेस के पास धाकड़ उम्मीदवारों की कमी नहीं है। 
दो बार से विधायक चुने जा रहे प्रहलाद भारती इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर यशोधरा राजे सिंधिया तक के चहेते हैं और उनकी छवि भी खराब नहीं है। इस कारण यह लगभग तय लग रहा है कि भाजपा तीसरी बार भी उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी। हालांकि  पूर्व विधायक नरेंद्र बिरथरे भी टिकट के दावेदार हैं, लेकिन उन्हें टिकट मिलने की संभावना उतनी उज्जवल नजर नहीं आ रही। श्री बिरथरे पोहरी से सन 1998 में विधायक रह चुके हैं, परंतु 2003 में न केवल वह चुनाव हारे बल्कि तीसरे स्थान पर रहकर उनकी जमानत भी जब्त हो चुकी है। पोहरी में विधायक पद पर या तो धाकड़ का या ब्राहमण का कब्जा रहा है। वोटों की राजनीति के हिसाब से धाकड़ मतदाताओं की संख्या इस विधानसभा क्षेत्र में 30 से 35 हजार के बीच है जबकि ब्राहमण मतदाताओं की संख्या 15 से 17 हजार के लगभग है। पलड़ा स्पष्ट रूप से जातिगत आधार पर धाकड़ उम्मीदवार का भारी रहता है, लेकिन जब-जब भी यहां से ब्राहमण उम्मीदवार जीते हैं तो उनकी जीत का कारण यहीं रहा है कि धाकड़ बर्शेज ऑल कास्ट। लेकिन विधायक प्रहलाद भारती के रहते हुए यह गणित सफल नहीं हो पाता, क्योंकि वह दबंग न होकर सहज हैं। इसलिए कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का गढ़ बनते जा रहे पोहरी किले को ढहाने के लिए सूत्र बताते हैं कि एक नई रणनीति पर काम कर रही है। इस रणनीति के तहत श्री भारती के मुकाबले धाकड़ उम्मीदवार उतारे जाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है जिससे धाकड़ मतों का बंटवारा हो सके और एन्टी इन्कमबंशी वोटों के सहारे भाजपा को पटकनी दी जा सके। कांग्रेस इस रणनीति पर इसलिए भी काम कर रही है, क्योंकि कांग्रेस के पास धाकड़ उम्मीदवारों का टोटा नहीं है। पूर्व विधायक बैजयंती वर्मा से लेकर सुरेश राठखेड़ा, विनोद धाकड़, लक्ष्मीनारायण धाकड़, प्रधुम्र वर्मा जैसे नाम टिकट की दौड़ में है।
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