योगेन्द्र जैन पोहरी-पोहरी तहसील के ग्राम पिपरघार में श्री मद भागवत का आयोजन चल रहा है कि ग्रहस्थोचित कर्म करते हुए मोक्ष प्राप्ति का सुगम रास्ता है श्रीमद् भागवत पुराण। आचार्य राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों का वर्णन बड़े ही रोचक ढंग से किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से रुकमणी, सत्यभामा जिनको पृथ्वी का अवतार बताया, जामवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नग्नजिति, भद्रा एवं लक्ष्मणा को बताया। द्वारिकापुरी में भगवान श्रीकृष्ण का ग्रहस्थ दर्शन में कृष्ण के अनेक चरित्रों का वर्णन बताया। सुदामा- चरित्र के तहत मित्र का भाव एवं मित्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हुए कहा कि मित्र से कभी कपट नहीं रखना चाहिए। श्री दतात्रेय जी के चौबीस गुरुओं के प्रसंग में स्पष्ट किया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं होती। हम जिससे भी ज्ञान प्राप्त करते हैं वह हमारे गुरु की श्रेणी में होता है। वह छोटा-बड़ा कोई भी हो सकता है। जहाँ तक कि संसार के अनेक जीव एवं प्रकृति भी हो सकती है।
मोक्षधर्म का रहस्य बताते हुए शास्त्री जी ने कहा- कि यदि जीवन है तो मृत्यु एक निशिचत क्रम है। जब इस भव से कोई जाता है तो वह खाली हाथ जाता है, यदि साथ जाता है तो वह मात्र धर्म है। जिसने जीवन को सही तरीके से नहीं जिया वह नर्कगामी होता है तथा जिसने सत्कर्म किए वह मोक्ष प्राप्त करता है। जिसने अपने माता-पिता एवं गुरुओं की वाणी का सम्मान नहीं किया वह जीवन में कभी सुख-सृमद्धि प्राप्त नहीं कर सकता। यदि जीव मोक्ष चाहता है तो उसे सच्चे मन से ईश्वर भक्ति एवं मोक्षधर्म का पालन करना होगा। शास्त्रीजी ने दत्तात्रेय के चौबीस गुरुओं के प्रसंग में कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पृथ्वी, सूर्य, वायु, अग्नि, मकड़ी, हाथी, और पिंगला आदि को अपना गुरु बनाया, जो संख्या में चौबीस थे। अंत में नवयुगेश्वर संवाद में भागवत के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। आचार्य राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री के कथा महत्व को हनुमान मंदिर पिपरघार पर डॉ. बाबूलाल, गणेश प्रसाद, बृजमोहन, राजेन्द्र, महेश, अरविन्द्र, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र, उत्तम, आकाश, भरत, मुकेश, राधामोहन, श्याम बिहारी ‘सरल’ एवं दिनेश धाकड़ के साथ सकुटुंब एवं सैकड़ों भक्तों द्वारा बड़े ही मनोयोग से सुना गया।






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