सेवानिवृत्त उपसंचालक मत्स्य विभाग की शिकायत पर हुई कार्यवाही

(संजय चिड़ार)शिवपुरी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खाद्य पदार्थों को बेचने वालों को यूं समय-समय पर कई आदेश देते रहते हैं लेकिन हकीकत में उन आदेशों का पालन होता है या नहीं यह देखने के लिए उनके पास समय ही नहीं है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जाता है कि कई दुकानदार दूषित खाद्य सामग्रियां बेचते रहते हैं। दूषित खाद्य के खाने से सेहत को खतरा रहता है, लेकिन प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। होटलों, बाजार, फल बाजार में खुली खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण आज उस समय सामने आया जब मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में सेवानिवृत्त उपसंचालक मत्स्य विभाग महेन्द्र कुमार दुबे फफंूद लगी मिठाई लेकर पहुंचे। श्री दुबे जनसुनवाई में एसडीएम को बताया कि उक्त मावा की मिठाई उन्होंने वीर सावरकर उद्यान के पास स्थित सेसई मिष्ठान भण्डार से खरीदी थी, लेकिन एसडीएम ने उनसे आवेदन लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें तत्काल ही इसकी शिकायत क्यों नहीं की और यह कैसे मान लिया जाए कि यह मिठाई उसी होटल की है और कलेक्टर को आवेदन देने की बात कहकर चलता कर दिया। कुछ समय बाद जिला पंचायत सीईओ आए तो महेन्द्र दुबे उन्हें आवेदन दिया तो उन्होंने तुरंत सीएमएचओ को कार्यवाही के लिए लिया। इसके बाद श्री दुबे सीएमचओ कार्यालय पहुंचे, जहां खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती सक्सेना अपनी टीम के साथ सेसई मिष्ठान भण्डार पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम उक्त मिष्ठान की दुकान पर पहुंची तो होटल संचालक ने कुछ मिठाई डस्टबिन में फेंक दिया और उत्पात भी मचाया।
खाद्य विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
शिकायकर्ता महेन्द्र कुमार दुबे ने बताया कि उनके द्वारा तीन वर्ष पूर्व उनके पुत्र के विवाह के अवसर पर भी इसी दुकानदार ने वधु पक्ष को 10 किलो मिठाई दी थी जिसमें फफूंद लगी थी जो वापस करना पड़ी। श्री दुबे ने आरोप लगाया कि खाद्य विभाग को इन होटल संचालकों को प्रतिमाह एक मोटी रकम पहुंचाई जाती है इसी के चलते इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती।
नियमों की परवाह नहीं
होटल में बनने वाली सामग्रियों के संबंध में शासन के निर्देश हैं कि जो भी सामग्रियां बनती हैं, उन्हें बनाने में कौन-कौन सी सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है स्पष्ट लिखा जाए। शहर की एक भी होटल संचालक ने इस नियम का पालन नहीं किया है। नियमों को ताक में रख होटल संचालक सेहत को बिगाडऩे वाली सामग्रियां खुले में बेच रहे हैं।
सिर्फ त्यौहारों के समय भरे जाते हैं सैम्पल
यहां बताना होगा कि जब भी कोई त्यौहार आता है तभी अधिकारियों द्वारा होटलों और दुकानों से सैम्पल भरे जाते हैं इसके बाद इस ओर किसी के द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो यह सैम्पल अधिकारियों द्वारा अपना त्यौहार मनाने के लिए भरे जाते हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैम्पल भरने के बाद इनके खिलाफ कोई कार्यवाही सामने नहीं आती है।
क्या कहते हैं शहर के लोग
-होटलों में खुलेआम नियमों की अनदेखी की जाती है। सड़ी-गली सामग्रियां बिक रहीं हैं। जिससे बीमारी का डर है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण बिक्री रुकती नहीं है। सप्ताह में एक बार तो निरीक्षण होना ही चाहिए।
-दुकानों पर रखे समोसे, जलेबियां पर मक्खियां मंडराती रहती है। बारिश में संक्रमण का खतरा रहता है लेकिन होटल संचालकों को व्यवसाय करने से ही मतलब रहता है लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं है। ऐसे में लोगों को भी जागरुक रहना चाहिए।






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