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पहले दादा को हराया, इस बार पंचायत से जीजा को हराया, इस बार भी वही कहानी दोहराने की तैयारी

कोलारस/बदरवास-कोलारस विधानसभा क्षेत्र को सामान्य घोषित होने के बाद दो आम चुनाव एवं एक उप चुनाव सम्पन्न हो चुके है और आगामी 6 माह के अंदर पुन: आम चुनाव होने के साथ 5 वर्ष के लिए कोलारस विधायक एवं प्रदेश में सरकार जनता द्वारा चुना जाना है। हम बात कर रहे है। कोलारस विधानसभा क्षेत्र की तो यहां कांग्रेस पार्टी ने भले ही सामान्य घोषित होने के बाद दो बार जीत दर्ज की हो किन्तु विधायक परिवार के नातेदार की करतूतो के कारण उन्हे लगातार निराशा हाथ लगी है। और आगे भी वही कहानी दौहराये जाने की संभावनाये नजर आ रही है। नातेदारी नजदीक की होने के कारण दादा के चुनाव हारने के बाद भी उन्हे पंचायत के चुनाव में चुनाव मैदान में उतारा गया जैसे तैसे ले दे कर पंचायत चुनाव तो जीत लिया किन्तु पंचायत चुनाव की नाराजगी पंचायत के लोगो ने विधानसभा के चुनाव में जीजा को हरा कर दे दी। अभी हाल ही में सम्पन्न हुये उप चुनाव की हार के बाद साले साहब की पैंतरे बाजी बदलने का नाम नही ले रही है। और यदि इस बार बसपा चुनाव मैदान में रही तो साले साहब की करतूतो के चलते कांग्रेस को निराशा हाथ भी लग सकती है। 
कोलारस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने बाली ग्राम पंचायत टुडयावद में पूर्व में हुये विधानसभा के चुनावो के दौरान पैसो के विवाद को लेकर विधायक के रिश्तेदार द्वारा विवाद करने के कारण दादा को 238 मतो से हार का सामना करना पडा उसके बाद राजनैतिक समीकरण बदलते गये। और टुडयावद में यादवी समाज के दूसरे गुट को सरपंची देने की मौखिक रजामंदी के बाद विधायक के रिश्तेदार ने सरपंची के चलते रजामंदी को तोडा जिसका परिणाम उप चुनाव में टुडयावद पंचायत यादवी वाहुल्य होने के बाद भी टुडयावद पंचायत से बर्तमान विधायक को हार का सामना करना पडा। रिश्तेदारी की मजबूरी के कारण विधायक का मौन साधना मजबूरी है। किन्तु उक्त नातेदार की करतूते अभी भी जारी है। चंद लोगो को खुश करने के लिए समाज के लोगो को नाराज करना तथा विधायकी से ज्यादा पंचायत के चुनावो को महत्व देने के कारण एक बार विधायक से हाथ धोना पडा, दूसरी बार पंचायत से हार झेलनी पडी और यदि नातेदार की कारगुजरियां इसी तरह जारी रही और बसपा चुनाव मैदान में आ गई तो इस बार कांग्रेस के बर्तमान विधायक को चुनाव में अच्छी खाशी मुश्वित का सामना करना पड सकता है। विधायक की रिश्तेदारी के कारण मजबूरियां हो सकती है किन्तु नातेदारो को चाहिए की पंचायत का मोह त्याग कर तथा कार गुजारियो को विराम देकर जीजा के बढते कदमो में उनका साथ देना स्वयं एवं रिश्तेदार दोनो के लिए लाभ का सौदा सावित होगा। वरना आने बाले विधानसभा के आम चुनाव में ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। 
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