
एक-एक पलंग पर चार-चार मरीज, हाथों पर पकड़कर ड्रिप चढ़वा रहे है मरीज
(संजय चिड़ार) शिवपुरी। प्रदेश में तीन बार कायाकल्प अवार्ड जीतकर बेहतर अस्पतालों में शुमार जिला अस्पताल शिवपुरी इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। गर्मी के सीजन में बढ़ती मरीजों की संख्या से अस्पताल की व्यवस्थाएं चारों खाने चित्त पड़ी हुई हैं। मरीजों के लिए न तो पलंग की सुविधा उपलब्ध हो पा रही है और न ही उन्हें चढऩे वाली ड्रिप के लिए स्टेण्ड। मरीजों या तो स्वयं अपने हाथ में ड्रिप को पकड़ते हैं या फिर अटेंडर, तब कहीं जाकर ड्रिप चढ़ पा रही हैं। अस्पताल की वार्डों में मरीज गैलरी में लेटे हुए हैं। 43 डिग्री तापमान में प्रसूताएं एवं मरीज गर्मी से बेहाल हैं। एक समय था जब अस्पताल में अच्छी गुणवत्ता वाले पंखे लगे हुए थे, लेकिन उन पंखों में से एक भी पंखा आज अस्पताल की गैलरियों में नजर नहीं आ रहा है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी पूर्व की भांति दिखाई नहीं देती है। वार्डों में बदबू फैली रहती है और मरीज मजदूरी में इन वार्डों में रहते हैं कुछ अपने मुंह पर कपड़ा लगाए रहते हैं क्योंकि इसके अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है।

घर से पंखा लाने को मजबूर
इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप है ऐसे में अस्पताल में कूल, पंखों की कमी के कारण लोग गर्मी से राहत पाने के लिए अपने घर से निजी पंखे, कूलर लाने को मजबूर बने हुए हैं।
मरीजों ने बयां की अपनी पीड़ा

-पेट में दर्द था और चक्कर आ रहे थे हॉस्पीटल में आया तो भर्ती कर लिया। न तो पलंग है और न ही गद्दा है। बोतल लगाने के लिए स्टेण्ड तक नहीं है। आरएमओ को फोन लगाया तो वह कह रहे थे कि हॉस्पीटल में यही व्यवस्था है या तो अपने घर से ले आओ।
हरिओम राठौर
पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष कांग्रेस
-मैं 10 तारीख को भर्ती हुआ था तब से डॉक्टर नहीं आए, आज डॉक्टर आए मेरा पर्चा खो गया मैंने दुबारा पर्चा बनवाया और मेरे 140 रुपए लग गए। मेरी छाती में दर्द होता है और मुझे खांसी भी उठती है। मैं आज ही बाजार से सिरिंज और ड्रिक की लेजम लेकर आया हूं।
वीरेन्द्र बाथम मरीज
–चार-पांच दिन से भर्ती हैं। पलंग नहीं मिला है। डॉक्टर चार-पांच दिन से नहीं आए हैं। सिरिंज और बोतल बाजार से लेकर आए।
नेपाल धाकड़, मरीज
क्या कहते हैं जिम्मेदार
- गर्मी के सीजन के बजह से मरीजों की संख्या बढ़ रही है इसलिए ड्रिप स्टैण्डों की कमी हो गई है। एक पलंग पर तीन से चार हैं जबकि अस्पताल में पलंगों की संख्या 300 से ही है। सिरिंज आज ही शॉर्ट हुई हैं और ऑर्डर भी कर दिया गया है। स्टॉक में कम ही हैं, जिन्हें रात के लिए भी बचाकर रखा जाता है क्योंकि रात में सिरिंज नहीं लाई जा सकती। फिर भी किसी पर एकदम दबाव नहीं बनाया जाता है कि तुम्हें लाना ही है।
- -बीमारियों का मौसम है और जिले के मरीजों का दबाव अस्पताल पर है। उपलब्ध संसाधनों में व्यवस्थाएं की जा रही है। अस्पताल की क्षमता 300 मरीजों की है, लेकिन बीमारी का मौसम होने से मरीजों की संख्या 900 हो गई है इसलिए व्यवस्थाएं बिगड़ रही हैं। मेडीकल कॉलेज में भी डॉक्टर पदस्थ हो रहे हैं कुछ ही समय में हालात सामान्य हो जाएंगे। ड्रिप की लेजम और सिरेंज बाहर से लाने के मामले में कहा कि कुछ सामान की आदेश दिए गए हैं जल्द ही आ जाएगा।






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