Press "Enter" to skip to content

एक बार फिर अभिभावकों की जेब पर डाका डालने की तैयारी में स्कूल संचालक

शिक्षा विभाग और प्रशासन की हीलाहवाली के चलते अभिभावकों को करते हैं गुमराह

शिवपुरी। अमूमन देखा जाए तो बच्चों के लिए विद्यालय भविष्य की पहली सीढ़ी होती है और वास्तविकता में होता भी यही है लेकिन आज के आधुनिक और व्यापारिक युग में स्कूल संचालकों द्वारा शिक्षा को पूरी तरह व्यापार का अड्डा बना लिया है और चंद पैसों के लिए कई स्कूल संचालक बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इनके द्वारा अभिभावकों तथा छात्रों के साथ धोखाधड़ी खुलेआम जारी है। पिछले सत्र में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कुछ स्कूलों पर मान्यता से अधिक तक संचालित होना पाया था। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर द्वारा कार्यवाही के भी निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद से मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी का परिणाम है कि अब यही स्कूल संचालक फिर से अपना धंधा चमकाने की जुगत में जुड़ गए हैं और अभिभावकों को गुमराह का उनकी जेब पर डाका डालने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि नियम अनुसार जिस स्कूल को जहां तक मान्यता प्राप्त है वह स्कूल उसी क्लास तक के बच्चों को एडमिशन दे सकता है, परंतु यहां कुछ स्कूल जिनके पास पांचवे तक की मान्यता है बेखौफ अंदाज में आठ वीं तक एडमिशन दे रहे हैं और जिनके पास आठ वीं तक की मान्यता है वे 12 वीं तक के बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं। इनके द्वारा अखबारों सहित होर्डिंग्स और बैनरों के माध्यम से अभिभावक और छात्र-छात्राओं को लुभाने के लिए आकर्षक प्रचार-प्रसार किया जाता है और बेधड़क मान्यता से अधिक अपने संस्थानों को बताया जाता है जो कि धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस खेल की जानकारी नहीं है, सबकुछ जानकार भी अनजान बने रहना और कार्यवाही न करना कहीं न कहीं दाल में काला होना दर्शाता है।

सचेत रहें अभिभावक

यदि आप अपने बच्चों का भविष्य संवारना चाहते हैं और उनको किसी स्कूल में प्रवेश दिलाने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। अभिभावक स्कूल में प्रवेश से पहले स्वयं स्कूल की मान्यता की हकीकत जानें न कि स्कूलों के द्वारा किए जा रहे प्रसार-प्रसार पर भरोसा कर अपने बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालें।

यह बरतें सावधानियां

यदि आप अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने जा रहे हैं तो आपको यह जानने के लिए कि किस स्कूल की मान्यता कहां तक है इसके लिए स्कूल के चक्कर लगाने की आवश्यकता है नहीं, बल्कि मप्र एज्युकेशन पोर्टल पर जाकर किसी भी स्कूल की समस्त जानकारी जान सकते हैं, इसके अलावा यह भी जान सकते हैं कि स्कूल में कितने अनुभवी शिक्षक हैं इससे स्कूल की पढ़ाई का स्तर स्पष्ट हो सकता है।

क्या कहते हैं जागरुक नागरिक

मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि शहर के कई स्कूल जो जर्जर भवन में संचालित है और जिनके पास जगह की भी कमी है और पर्याप्त संसाधन नहीं है इसके बावजूद भी ये स्कूल 10 वीं और 12 वीं तक कैसे संचालित हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह उठता है कि इन स्कूलों को मान्यता ही किस आधार पर मिली है? 

मुकेश गौड, स्थानीय निवासी

नोट- जल्द ही ऐसे स्कूलों का फास्ट समाचार द्वारा खुलासा किया जाएगा जो मान्यता से अधिक कक्षाओं तक संचालित हैं।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!