
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन का किया बहिष्कार और बिना ज्ञापन दिए वापस लौटे
शिवपुरी। 41 दिन से सिंध के पानी के लिए सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे जलक्रांति सत्याग्रहियों ने आज शासन और प्रशासन का शिवपुरी की विकट पेयजल संकट की ओर आकर्षित करने तथा सिंध जलावर्धन योजना के भ्रष्टाचारियों को दण्डित कराने की दृष्टि से नगर के प्रमुख मार्गों से एक प्रभावी रैली निकाली जिसमें बड़ी संख्या में चिलचिलाती धूप में महिला, पुरूष और बच्चे शामिल हुए। सत्याग्रही हाथों में पानी की कट्टियां, गगरी और मटके लिए हुए थे तथा महिलाएं जोरशोर से नारे लगा रही थी घर के बर्तन करे पुकार सिंध का पानी भर दो यार, जब-जब जनता जागी है भ्रष्टाचारियों की रूह कांपी है, शिवपुरी में मचा बबाल भ्रष्टाचारी करे कमाल, पानी नहीं तो वोट नहीं, नोट पर अब चोट सही। खास बात यह थी कि रैली में कोई भी राजनैतिक व्यक्ति शामिल नहीं था और यह विशुद्ध रूप से आमजन तथा पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज जनता की रैली थी जिसने शासन और प्रशासन के होश उड़ा दिए। कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने के लिए जब रैली पहुंची तो वहां उन्हें प्रशासन से कोई तबज्जो नहीं मिली जिसका परिणाम यह हुआ कि डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद जलक्रांति सत्याग्रहियों ने प्रशासन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया और बिना ज्ञापन दिए वह वापिस लौट आए।
सिंध के जल के लिए आंदोलन कर रहे जलक्रांति सत्याग्रहियों ने आज सुबह 11 बजे से पुराने प्रायवेट बस स्टेण्ड के पास से एक रैली निकाली जिसमें देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में पानी के लिए परेशान लोग अंतप्रेरणा से वहां आ गए जिनमें से अधिकतर लोग बेहद गरीब थे और बता रहे थे कि किस तरह से पानी की एक-एक बंूद जुटाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रायवेट बस स्टेण्ड से शुरू हुई रैली माधवचौक, गांधीचौक, कोर्ट रोड, अस्पताल चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचीं जहां आंदोलनकारियों को जल समस्या के लिए कलेक्टर को आवेदन देना था, लेकिन कलेक्ट्रेट के मुख्य दरबाजे पर रैली को रोक दिया गया और ज्ञापन लेने के लिए डिप्टी कलेक्टर आरबी प्रजापति वहां पहुंचे, परंतु जलक्रांति सत्याग्रहियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इंकार कर दिया तथा कहा कि नवनियुक्त कलेक्टर यहां आए उन्हें सुनें, उनकी समस्याएं जानें तथा ज्ञापन लें इससे उनमें हमें जल संकट से निजात दिलाने में संवेदना का पता चलेगा। इस पर डिप्टी कलेक्टर प्रजापति ने आंदोलनकारियों से कहा कि कलेक्टर बाहर हैं और शाम तक आएंगी, लेकिन आंदोलनकारी नहीं मानें और उन्होंने कहा कि हम उनका इंतजार करेंगे। इसके बाद लगभग डेढ़ घंटे तक चिलचिलाती धूप में महिला, पुुरूष और बच्चे वहीं जमे रहे। कुछ लोगों के धैर्य ने भी जवाब दिया। परंतु प्रशासन ने ऐतिहात बरतते हुए कलेक्ट्रेट के दरबाजों पर ताले जड़ दिए। परेशान होकर अंतत: आंदोलनकारियों ने प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिए और प्रशासन के बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। 





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