खेलमंत्री की विधानसभा में 500 से अधिक महिलाओं के प्रकरण लंबित
एक हजार से ज्यादा महिलाओं को राशि का भुगतान लटका पड़ा है
शिवपुरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का शिवपुरी जिले में बुरा हाल है। महिला बाल विकास अधिकारी कार्यालय योजना के क्रियान्वयन में रूचि नहीं ले रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए जिले में लगभग 1000 पात्र महिलाएं अधिकारियों और दफ्तरों के आगे पीछे भाग रही हैं पर उनकी व्यथा की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। योजना के तहत पात्र गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार के लिए शासन द्वारा 6000 रूपए दिए जाते है ताकि प्रसव सुरक्षित हो तथा जच्चा और बच्चा स्वस्थ रहें। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में जहां यशोधरा राजे सिंधिया कैबिनेट मंत्री हैं इस योजना के तहत 500 प्रकरण लंबित पड़े है। आरोप है कि संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के कारण योजना का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की 4 साल की उपलब्धियों को जनता तक बताने के लिये मंत्रीगण देश भर में घूम रहे है । रविवार को प्रभारी मंत्री रुस्तम सिंह ने भी 4 साल का लेखाजोखा प्रस्तुत किया लेकिन शिवपुरी जिले में जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है वह भी मोदी सरकार की इस फ्लैगशिप योजना को लेकर। जो आंकड़े सामने आए है उनके अनुसार शिवपुरी जिले के जिला महिला बाल विकास दफ्तर में इस समय 988 गर्भवती, धात्री महिलाओं के प्रकरण स्वीकृति की बाट जोह रहे है।
अफसरों की अड़ंगेबाजी के कारण लटका भुगतान
सबसे बुरी हालत शिवपुरी शहरी परियोजना की है। जहां 358 महिलाओं को जानबूझकर मातृ वंदना योजना से वंचित कर रखा गया है। इसी तरह शिवपुरी ग्रामीण परियोजना में 146 , बदरवास में 96, करैरा में 122, खनियाधाना में 83, कोलारस में 76, नरवर में 27, पिछोर में 31, पोहरी में 49 ऐसी महिलाएं है जिनके प्रकरण स्वीकृति के लिए शिवपुरी के जिला कार्यालय में धूल खा रहे है। इनके अलावा बडी संख्या में प्रकरण परियोजना दफ्तरों में भी लंबित है। जाहिर है विभाग के अफसर इस महत्वपूर्ण और लोकोपकारी योजना को अपनी प्राथमिकता में नही ले रहे है।
खेल मंत्री के विधानसभा में परेशान महिलाएं
इस योजना का सबसे बुरा हाल तो शिवपुरी विधायक और राज्य सरकार में मंत्री यशोधरा राजे के क्षेत्र में है जहां सर्वाधिक 500 से अधिक प्रकरण रोके गए है । इस योजना के तहत आंगनबाड़ी पर उन महिलाओं का पंजीयन किया जाता है जो गर्भवती है स्तनपान कराती है उन्हें मोदी सरकार तीन किश्तों में 6000 रुपए की सहायता उपलब्ध कराती है ताकि ऐसे गरीब परिवारों की महिलाओं को प्रसव से पैदा हुई शारीरिक कमजोरियों से मुक्ति के लिये पोषण की व्यवस्था हो सके।
पीएम की योजना अधर में, भाजपाई भी नहीं दे रहे ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार इस योजना को लेकर अपने कार्यकर्ताओं से प्रचार प्रसार की बात कह चुके है लेकिन अफसरों की तरह बीजेपी के कार्यकर्ता भी भगवान भरोसे है। यहां तक कि बीजेपी ने अपनी कुछ महिला कार्यकर्ताओ को इस योजना का प्रभारी भी बनाया है लेकिन जिले में इस योजना की दुर्गति पर कोई ध्यान देने वाला नही है। इस योजना के प्रति महकमे की बेरुखी का दूसरा पहलू यह भी है कि बड़ी संख्या में जरूरतमंद पात्र महिलाओं को इस योजना में पंजीकृत ही नही किया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
मातृ वंदना योजना में जिन महिलाओं के दस्तावेजों में कमी थी उनके प्रकरण लंबित हैं। फिर भी हम लगे हुए हैं कि महिलाओं के सभी कागजों का वेरिफेक्शन हो जाए और जो कमियां हैं उन्हें दूर किया जाए, जिससे उनको राशि का भुगतान हो सके।




