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विवादों में रहने वाली करैरा विधायिका खटीक का नाम टिकिट कटने वालों की लिस्ट में, दावेदारों ने बढ़ाई सक्रियता

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है करैरा सीट, बसपा का भी इस सीट पर अच्छा प्रभाव

शिवपुरी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बयान दिया है कि प्रदेश के 56 कांग्रेसी विधायकों में से कम से कम 25 विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि टिकट काटे जाने वाले विधायकों में करैरा की विधायक श्रीमति शकुंतला खटीक भी है। श्रीमति खटीक की कार्यप्रणाली काफी विवादित रही है और जनता में भी उनकी लोकप्रियता पिछले चुनाव के मुकाबले कम हुई है। विधायिका के टिकट कटने की भनक पाकर करैरा में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। वहीं इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का भी अच्छा प्रभाव माना जाता है। यहां से 2003 में बसपा प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल विजयी हुए थे। जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त करा दी थी। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि यदि प्रदेश में कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन हुआ तो करैरा सीट बसपा के खाते में भी जा सकती है। 
करैरा विधानसभा क्षेत्र 2008 के विधानसभा चुनाव से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। आरक्षित होने के बाद अभी तक हुए दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने एक एक बार विजय हासिल की है। 2008 के विधानसभा चुनाव में करैरा सीट से भाजपा प्रत्याशी रमेश खटीक विजयी हुए थे, लेकिन 2008 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर कोलारस के पूर्व विधायक ओमप्रकाश खटीक को टिकट दिया और ओमप्रकाश कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमति शकुंतला खटीक से पराजित हो गए। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2 लाख 40 हजार मतदाता हैं जिनमें से 70 से 75 हजार मतदाता अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। अनुसूचित जाति वर्ग में सर्वाधिक संख्या जाटव मतदाताओं की है। इस क्षेत्र में लगभग 45 हजार जाटव मतदाता हैं। करैरा क्षेत्र में रावत मतदाताओं की संख्या लगभग 20 हजार, गुर्जर और यादव मतदाताओं की संख्या लगभग 15 हजार है। करैरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से टिकट के दावेदार उतने अधिक नहीं है जितने कांग्रेस के हैं। भाजपा की ओर से पूर्व विधायक रमेश खटीक और ओमप्रकाश खटीक की दावेदारी मानी जा रही है जबकि कांग्रेस में आधा दर्जन से अधिक दावेदार सक्रिय हैं। इनमें से अधिकतर सिंधिया खेमे के हैं। हालांकि टिकट के लिए विधायिका शकुंतला खटीक भी पूरी ताकत से सक्रिय है, लेकिन उन्हें टिकट मिलेगा इसकी संभावना काफी क्षीण मानी जा रही है। 

कांग्रेस लड़ी तो सिंधिया खेमे के खाते में जाएगा टिकट

यदि कांग्रेस का बसपा से प्रदेश में गठबंधन नहीं हुआ तो पार्टी का टिकट सिंधिया खेमे के खाते में जाना तय है। कांग्रेस ने इस क्षेत्र में उम्मीदवारों का सर्वे भी करा लिया है। उम्मीदवारी की दौड़ में कांग्रेस नेता केएल राय लंबे समय से करैरा से टिकट की मांग कर रहे हैं। वह लगातार सक्रिय बने हुए हैं। श्री राय 15 साल पहले डिप्टी कलेक्टर पद से सेवानिवृत हुए और तब से वह सिंधिया खेमे की राजनीति में सक्रिय हैं। वह कांग्रेस के जिला महामंत्री भी हैं। मिलनसार व्यक्तित्व के धनी के राय का नाम टिकट की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है। पिछले एक साल से राजनीति में सक्रिय मानसिंह फौजी का नाम भी सामने आ रहा है। 17 साल की सेना की नौकरी से सेवानिवृत होकर मानसिंह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए हैं और सांसद सिंधिया से भी उनका लगातार जीवंत संपर्क बना हुआ है। श्री फौजी के ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे भी हो गए हैं। पिछले चुनाव में भी युवा नेता योगेश करारे ने भी टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इस बार फिर वह सक्रिय हैं और उनके करैरा के दौरे शुरू हो गए हैं। टिकट की दौड़ में जसवंत जाटव का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। श्री जाटव पूर्व जिला पंचायत सदस्य हैं और राजनीति में लंबे समय से सक्रिय बने हुए हैं। उनका नाम पैनल में आना तय माना जा रहा है। इनके अलावा दिग्विजय सिंह खेमे के जिला पंचायत सदस्य दिनेश परिहार भी टिकट की कतार में हैं। पिछले चुनाव में टिकट के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। इस बार टिकट के लिए उनकी सक्रियता कुछ कम नजर आ रही है। 
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