
शिवपुरी। 2008 के चुनाव से सामान्य हुई कोलारस विधानसभा क्षेत्र से अभी तक हुए तीन चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी दो बार और एक बार भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। तीन माह पहले हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र यादव ने भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन को लगभग 8 हजार मतों से पराजित किया था, लेकिन इसके बाद भी 2018 के विधानसभा चुनाव में कोलारस से कांग्रेस की जीत उतनी आसान नहीं है। कांग्रेस को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा। भाजपा ने कोलारस सीट जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस क्या तीन माह पहले विधायक बने महेंद्र यादव का टिकट काटने का साहस दिखा पाएगी अथवा नहीं।
कोलारस विधानसभा क्षेत्र सामान्य होने के बाद हुए तीन चुनावों में खास बात यह है कि तीनों बार भाजपा की ओर से पूर्व विधायक देवेंद्र जैन ने मोर्चा संभाला। 2008 के चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशी स्व. रामसिंह यादव से हुआ और कांटे के संघर्ष में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन को महज 250-300 मतों से विजयश्री हासिल हुई, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में स्व. रामसिंह यादव ने भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन से अपनी हार का करारा बदला ले लिया। स्व. रामसिंह यादव प्रदेश में भाजपा की लहर के बावजूद अपने प्रतिद्वंदी देवेंद्र जैन से 25 हजार से अधिक मतों से जीते। वह भी उस स्थिति में जबकि मुकाबले में बसपा के मजबूत प्रत्याशी चंद्रभान सिंह यादव थे जिन्होंने लगभग 20 हजार मत बटोरे। स्व. यादव अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाए और हृदयाघात से उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद कांग्रेस ने सहानुभूति लहर बटोरने के लिए राजनीति से अनजान उनके व्यवसायिक पुत्र महेंद्र यादव को चुनाव मैदान में उतारा जो पूरी तरह से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आश्रित रहे। जबकि भाजपा ने भले ही देवेंद्र जैन को टिकट दिया, लेकिन उन्हें जिताने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, यशोधरा राजे सिंधिया, नरोत्तम मिश्रा सहित समूची कैबिनेट ने पूरी ताकत फूंक दी। भाजपा की मुश्किल यह भी थी कि मैदान में बसपा का कोई प्रत्याशी नहीं था। जिसका लाभ भी कांग्रेस प्रत्याशी को मिल रहा था। ऐसा माना जा रहा था कि उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की 30-40 हजार मतों से अधिक विजय होगी। भाजपा की मेहनत का परिणाम यह हुआ कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते गए कांग्रेस और भाजपा के बीच मतों की खाई कम होती रही और चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र यादव की जीत का अंतर अपने पिता की तुलना में काफी घटकर महज 8 हजार मतों पर सिमट गया। इस पराजय के बाद भी भाजपा ने महसूस किया कि यदि कोशिश की जाए तो कांग्रेस के कोलारस गढ़ पर कब्जा किया जा सकता है। इस सोच के आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया जनता का आभार प्रदर्शन करने के लिए आते उसके पूर्व ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलारस आकर जनता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और कहा कि हार के बाद भी वह अपने वायदे नहीं भूले हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने चुनाव के दौरान बदरवास में कॉलेज की घोषणा की थी और उस घोषणा को पूर्ण किया गया। कोलारस स्टेशन पर इंदौर इंटरसिटी के स्टॉपेज का आश्वासन दिया गया था उसे भी भाजपा ने पूर्ण कर दिखाया और इंटरसिटी ट्रेन अब कोलारस में भी रूकने लगी। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेंद्र शर्मा उपचुनाव के बाद से लगातार कोलारस में सक्रिय हैं और समय समय पर कोलारस विधानसभा क्षेत्र की हर छोटी बड़ी समस्या को वह उठा रहे हैं। कोलारस क्षेत्र के लोगों के लिए टोल टैक्स के मासिक पास बनवाने में भी उन्होंने बहुत मेहनत की। उसकी तुलना में उपचुनाव के बाद कांग्रेस की सक्रियता विधानसभा क्षेत्र में थमी है। विधायक महेंद्र यादव भी जनता के प्रति विश्वास को कायम नहीं रख पा रहे हैं। अपने पिता की छवि का लाभ उठाकर वह उपचुनाव भले ही जीत गए हों, लेकिन तीन माह में ही एंटी इन्कमबंशी उनके खाते में जुड़ गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस आलाकमान की सोच है तीन माह पहले जो विधायक बना हो उसका टिकट कैसेे काटा जाए, लेकिन सर्वे को आधार यदि बनाया गया तो कमलनाथ की सूची में महेंद्र यादव स्थान पा सकते हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने घोषणा की है कि प्रदेश में कम से कम 25 विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। वैसे भी कोलारस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस में टिकट दावेदारों की कोई कमी नहीं है।






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