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प्रभुजी के रूप में परमात्मा बसते है अपना घर आश्रम में : डीआईजी आर के शाह

अपना घर आश्रम के प्रथम वार्षिक महोत्सव में प्रभुजी सेवा करने आगे आऐं धर्मावलंबी, बने सहयोगी किया दान 
शिवपुरी-पीडि़त मानवता का जो स्वरूप अपना घर आश्रम में देखा है उससे प्रतीत होता है कि परमात्मा को कहीं देखने की आवश्यकता नहीं है, परमात्मा तो इन प्रभुजीओं के रूप में अपना घर आश्रम में बसते है जो मानसिक रोगी, बेसुध हों, जिन्हें ना खाने- ना पीने की, ना ओढऩे की, दु:खी, बीमार, लाचार हो और इन्हें सेवा दी जाए यही तो परमात्मा का कार्य है,भगवान को किसी ने नहीं देखा लेकिन वह ईश्वर इन प्रभुजियों की सेवा कर मानव को अपना आर्शीवाद और प्रेरणा देते है कि इस धरती पर मनुष्य जन्म लिया है तो मानव सेवा सबसे बड़ी सेवा है, कोई जानवर किसी की मदद नहीं कर सकता लेकिन इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो सभी की सेवा कर सकता है और यह सेवा उसे अपने मनोभाव से करनी होगी तभी सही अर्थों में इन प्रभुजियों की सेवा सार्थक मानी जाएगी। उक्त विचार प्रकट किए आईटीबीपी के डीआईजी आर.के.शाह ने जो स्थानीय लालमाटी फतेहपुर में दुबे नर्सरी के समीप स्थित अपना घर आश्रम में पहुंचकर वहां प्रभुजियों के हाल-चाल और इन प्रभुजियों की सेवा करने वाले लोगों को देख इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने संबोधन में प्रभुजियों को परमात्मा के समान बताया। 
इस दौरान वह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन दे रहे थे। कार्यक्रम के अन्य मंचासीन अतिथियों में डॉ.पी.के.खरे, विधायक पोहरी प्रहलाद भारती, संस्थापक अपना घर आश्रम बी.एम.भारद्वाज, अ.भा.राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.पी. सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में अपना घर आश्रम की सेवा गतिविधियों को जानकर वहां दानदाताओं की लंबी कतार लग गई और धर्मावलंबियों ने अपनी सामथ्र्य अनुसार इस आश्रम संचालन हेतु वार्षिक सदस्यता, आजीवन सदस्यता के रूप में ग्रहण की। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने आजीवन अपनी ओर से नि:शुल्क आटा प्रदान करने का संकल्प लिया तो वहीं राजेन्द्र चौधरी राजा किराना की ओर से नि:शुल्क चावल प्रदान करने का संकल्प लिया गया। डीआईजी श्री शाह के अनुसार सकारात्मक खबरों को समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में स्थान मिलने का आग्रह भी कार्यक्रम में किया ताकि सेवाभावी लोग इन आयोजनों से जुड़े सके और मीडिया से सहयोग की अपील भी की। इस अवसर पर अपना घर आश्रम संस्था के संयोजक गौरव जैन, अध्यक्ष गोविन्दप्रसाद बंसल, उपाध्यक्ष गोपालकृष्ण बंसल, भगवान सिंघल, सचिव कैलाश नारायण दुबे, सह.सचिव जगदीश निगौती, कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद गोयल, प्रचार मंत्री प्रमोद जैन, महिला प्रमुख श्रीमती आशा अग्रवाल भी मौजूद रहे जिन्होनें प्रथम वार्षिक महोत्सव कार्यक्रम के आयोजन की रूपरेखा रखी और इसे भव्य बनाया। संचालन महेन्द्र कुमार रावत ने जबकि आभार प्रदर्शन संस्था सचिव कैलाश नारायण दुबे द्वारा व्यक्त किया गया। अंत में प्रसाद वितरण हुआ।सेवाभावियों का हुआ सम्मान
अपना घर आश्रम संचालन में बिना किसी स्वार्थ के सेवाऐं प्रदान करने वाली विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और सेवाभावी लोगों का सम्मान भी किया गया। इसमें डॉ.मुकेश जैन महावीर पैथोलॉजी, डॉ.पी.के.खरे सर्जन जिला चिकित्सालय, डॉ.आर.के.दुबे सहयोगी, आनंद जैन सेवानिवृत्त कम्पाउण्डर, महावीर जैन, अमन गोयल समाजसेवी, कृष्ण गोपाल संचालक ईश्वर गैस एजेंसी, हनुमान मंदिर सेवा समिति के सदस्य, कपिल सहगल आदि शामिल है इस दौरान भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति द्वारा अपना घर आश्रम को नि:शुल्क सिलाई मशीन भेंट की गई। 

बेघरों को अपना घेर देता है अपना घर आश्रम: राष्ट्रीय अध्यक्ष एमपी सिंह 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अपना घर आश्रम के अ.भा.राष्ट्रीय अध्यक्ष एमपी सिंह ने अपना घर आश्रम की कार्यविधि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संपूर्ण देश भर के पांच राज्यों में 23 स्थानों पर अपना घर आश्रम संचालित हो रहा है जहां करीब 4 हजार लोग अपना घर आश्रम में प्रभुजी के रूप में मौजूद है इसमें भी वह अपने घर की भांति रहते है इसके अलावा बालक-बालिकाऐं, युवती, महिला-पुरूष वह बेघर लोग जो किसी दीन-दु:खी के रूप में सड़क, बाजार, स्टेशन आदि पर पड़े रहते है उनकी सेवा अपना घर आश्रम के द्वारा की जाती है और इन्हें अपना समझकर ठीक किया जाता है कोई अपने खोए पिता, पति, भाई-बहिन, बेटी से मिलता है तो कोई अपने आपको इस संसार में स्वस्थ पाकर अपने जीवन को जी रहा है। 

अपना घर आश्रम एक विचारधारा है जो दिखता है दीन:दुखियों के रूप में : संस्थापक बीएम भारद्वाज

अपना घर आश्रम के संस्थापक बृजमोहन भारद्वाज ने बताया कि दीन:दुखियों के रूप में जो मानव बेसुध, बेघर और अबोध मानसिक रोगी के रूप में नजर आते है उनकी सेवा करने का माध्यम है अपना घर आश्रम यह एक विचारधारा है जो इसे मानव कल्याण के रूप में अंगीकार कर लेते है वह अपना घर आश्रम से जुड़ जाते है हमें आवश्यकता होती है संसाधनों की तो यह आवश्यकता एक चिठ्ठी के रूप में ठाकुरजी(भगवान) को लिख देते है और एक सूचना बोर्ड लगा देते है जो परमात्मा के रूप में हमें अपने संसाधन कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में मिल जाता है। किसी भी धर्म का कोई मानव हो उसे अपना घर आश्रम में स्थान मिलता है और उसी धर्म के अनुसार उसका खान-पान-रहन-सहन, जीवन-मृत्यु सभी संस्कार पूर्ण किए जाते है। यह संस्था किसी अनुदान से नहीं बल्कि सेवा के माध्यम से चलती है और बड़ी से बड़ी बीमारी भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा अपना घर आश्रम के द्वारा ठीक कराई जाती है। 

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