
आठ दिन तक चलने वाले पर्यूषण पर्व प्रारंभ, धर्माराधना कराने के लिए भीलवाड़ा से आईं बहिनें
शिवपुरी। पर्यूषण पर्व आत्मा के उत्थान का पर्व है। पर्व के आठ दिनों में आत्मा पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाता है। उक्त उद्गार स्थानीय पोषद भवन में भीलवाड़ा राजस्थान से आईं श्रीमती शांता पोखरना ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पोषद भवन में किसी संत और साध्वी का चातुर्मास न होने के कारण जैन समाज के लोगों को धर्म आराधना कराने के लिए भीलवाड़ा राजस्थान से श्रीमती शांता पोखरना और श्रीमती कांता सांखला पधारीं हुईं हैं।
पोषद भवन में प्रतिदिन सुबह साढ़े आठ बजे से प्रवचन प्रारंभ हुए जिसमें सबसे पहले श्रीमती कांता सांखला ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। इसके बाद श्रीमती शांता पोखरना ने पर्यूषण के महत्व को बताते हुए कहा कि वर्ष में 8 दिन धार्मिक आराधना करने के होते हैं। इन आठ दिनों में हमें अधिक से अधिक धर्म आराधना करनी चाहिए। व्रत, उपवास, सामायिक, प्रतिक्रमण करना चाहिए जिससे आत्मा की साफ सफाई हो सके। उन्होंने कहा कि वर्ष में अन्य दिनों में तो हम सांसारिक क्रियाओं में लिप्त रहते हैं और अपनी आत्मा की ओर हमारा जरा भी ध्यान नहीं जाता, लेकिन पर्यूषण पर्व में हमें आत्मा की उन्नति के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने पुरुषार्थ कर केवल्य ज्ञान प्राप्त किया। हम मिथ्यात्व को छोड़कर सम्यकत्व की स्थिति को प्राप्त करें। पर्यूषण पर्व में कम से कम मोबाइल का इस्तेमाल करें, टीव्ही आदि न देखें और अधिक से अधिक तपस्या करने की कोशिश करें तभी हमारा क्षमावाणी पर्व मनाना सार्थक होगा।






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