
शिवपुरी। फीस प्रतिपूर्ति के साथ शिक्षा सुधार की मांगों को लेकर निजी स्कूल संस्था संघ द्वारा बुधवार को जिले के 400 स्कूलों ने अनिश्चितकाल बंद के तहत गुरुवार को शिक्षण संस्थाएं अनिश्चितकालीन बंद करने का ऐलान किया था। जिसमें प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश नेतृत्व की मुलाकात के बाद सरकार द्वारा कुछ मांगे मान लेने के बाद अब अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस ले लिया गया है। स्कूल संचालकों की हड़ताल से इन स्कूलों में फीस जमा करके पढ़ने वाले करीब 71 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने से बच गई।
निजी स्कूलों में आरटीई की राशि का सरकार द्वारा दो साल से भुगतान नहीं किया है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे स्कूलों पर पड़ रहा है। फीस पूर्ति के साथ शिक्षा में सुधार की मांग पर भी सरकार संस्थानों का पक्ष नहीं सुन रही है। इसके खिलाफ जिले के 400 स्कूल गुरुवार को बंद रहे। इसके साथ ही प्रदेश स्तर पर संगठन ने गुरुवार को विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की जिसमें बोर्ड में फिर से प्राइवेट व्यक्ति को शामिल रखने का निर्णय लिया साथ ही अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनी इसके बाद शुक्रवार से अनिश्चितकाल के लिए जो अब बंद होना था वह नहीं होगा।
निजी स्कूल संचालकों की माने तो निजी स्कूलों आरटीई की राशि का सरकार द्वारा दो साल से भुगतान नहीं किया है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे स्कूलों पर पड़ रहा है। फीस पूर्ति के साथ शिक्षा में सुधार की मांग पर भी सरकार संस्थानों का पक्ष नहीं सुन रही है। इस तरह की कई मांगें हमारी निजी स्कूल संचालकों की थी जिसके चलते विरोध प्रदर्शन कर कलेक्टर को प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी दे चुके है। ऐसे में शिक्षकों के व्यापक विरोध के चलते अब सरकार ने कुछ मांगों को पूरा करने की बात कही है जिसे निजी स्कूल संचालकों ने मान लिया है और अब वह अनिश्चित कालीन हड़ताल पर नहीं रहेंगे।
अर्द्धवार्षिक परीक्षा होना थी जिससे बच्चों की पढाई होती प्रभावित
अभिभावकों द्वारा प्रति महीने फीस जमा करने वाले 71 हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई अब प्रभावित होने से बच गई है। क्योंकि सितंबर में कई स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा होना है। स्कूलों में परीक्षा का कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है। स्कूल संचालक संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग तक को हड़ताल करने की सूचना नहीं दी थी। ऐसे में अभिभावक अल्पेश जैन का कहना है कि बेटी की हर महीने फीस जमा कर रहे हैं। नि:शुल्क शिक्षा में शामिल बच्चों की फीस के कारण दूसरे बच्चों के भविष्य के साथ संचालकों द्वारा यह खिलवाड़ है। शिक्षा विभाग को इस पर कार्रवाई करना चाहिए। हड़ताल बंद हो जाने से अब अभिभावकों की परेशानी भी खत्म हो गई है अन्यथा स्कूल संचालकों की हड़ताल का भुगतान अभिभावकों को करना पड़ता।
हमारे प्रतिनिधि को बोर्ड में शामिल किया जाएगा ताकि वह हमारी समस्याएं रख सके
स्कूल एसोसिएशन के ब्लॉक अध्यक्ष धीरज शर्मा की माने तो पहले बोर्ड में निजी प्रतिनिधियों को भी सदस्य के रुप रखा जाता था। शिवपुरी से बोर्ड सदस्य के रुप में प्रहलाद भारती और अन्य सदस्य भी बोर्ड के रहे है जो समय समय पर सरकार को निजी स्कूल संचालकों की परेशानी को रखते रहे है। अब आश्वासन मिला है कि वह स्कूल संचालकों की मांगों को मानेंगे इसलिए निजी स्कूल संचालकों ने अपनी हड़ताल को वापस लिया है।
सरकार हमारी मांग पर ध्यान नहीं दे रही
सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही थी। आरटीई में एक बच्चे की फीस 4419 रुपए दी जा रही है। जबकि अन्य राज्यों में 15 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। कम राशि देना है फिर भी दो साल से भुगतान नहीं किया। इसके विरोध में गुरुवार को स्कूल बंद किए गए। अब प्रदेश स्तर पर हुए निर्णय के बाद हमने शुक्रवार से वापस स्कूल खोलने का निर्णय लिया है।
राजकुमार शर्मा, अध्यक्ष,स्कूल एसोसिएशन






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