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SHIVPURI POLITICS- कांग्रेस की हालत पतली, यशोधरा राजे को कौन देगा टक्कर सबसे बड़ा सवाल ?

शिवपुरी। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे कांग्रेस की शिवपुरी विधानसभा सीट को लेकर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, बढऩा भी लाजिमी है क्योंकि 1993 से यदि शिवपुरी विधानसभा सीट के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2006 के उपचुनाव को छोड़कर कांग्रेस वनवास काट रही है। वर्तमान में भी भाजपा के अभेद गढ़ को भेदने के लिए कांग्रेस की न तो कोई खास रणनीति दिखाई दे रही है और न ही ऐसा प्रत्याशी जो भाजपा के अघोषित प्रत्याशी केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को चुनौती दे सके। 1998 से लगातार चार विधानसभा चुनाव में यशोधरा राजे सिंधिया या फिर उनके समर्थक जीतते आए हैं (उपचुनाव को छोड़कर)। यशोधरा राजे सिंधिया की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह स्वयं तो जीतती ही हैं और यदि जिसके सिर पर हाथ रख दें तो उसकी नैय्या भी पार करा देते हैं। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद पिछले आंकड़े बयां करते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्व विधायक माखनलाल राठौर को विधायक का चुनाव यशोधरा राजे सिंधिया ने अपने दम पर जिताकर श्री राठौर को विधायक बनने का गौरव हासिल करा दिया। भाजपा के पास यशोधरा राजे सिंधिया जैसी प्रत्याशी होने पर वह शिवपुरी से जीत के लिए पूरी तरह से आशान्वित है और हो भी क्यों न शिवपुरी की जनता से राजे का पारिवारिक जुड़ाव जो है। वहीं दूसरी ओर जितनी सुखद स्थिति में भाजपा है, उसके विपरीत विकट परिस्थिति में कांग्रेस खड़ी नजर आ रही है। 

कांग्रेस दावेदारों के माथे पर बढ़ती चिंता की लकीरें

कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लडऩे के इच्छुक दावेदारों के माथे पर दिनों दिन चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कांग्रेस आलाकमान से अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे कि कोई भी प्रत्याशी निश्चिंत होकर दमखम से चुनाव की तैयारी कर सके। अभी तक प्रत्याशी की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से दावेदार भी पूरी ताकत नहीं झोंक पा रहे हैं जबकि चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, वहीं दूसरी ओर बात करें भाजपा की तो भले ही प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया हो, लेकिन अघोषित रूप से राजे ही भाजपा की प्रत्याशी मानी जा रही हैं और उनकी चुनावी तैयारियां भी दिखने लगी हैं। 

कांग्रेस से कई चेहरों के नाम कतार में

कांग्रेस से दावेदारों की बात करें तो राकेश गुप्ता, सिद्धार्थ लढ़ा, राकेश जैन आमोल के नाम प्रमुखता से कतार में दिखाई दे रहे हैं। 
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