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डेंगू के कहर से टूटा धैर्य: दो बच्चियों सहित सात की मौत, स्वास्थ्य विभाग और नपा निष्क्रिय

शिवपुरी। शिवपुरी में जानलेवा डेंगू का कहर निरंतर बढ़ता जा रहा है। अभी तक अधिकृत रूप से 50 से अधिक मरीज डेंगू पॉजीटिव पाए गए हैं और अभिभाषकों की यदि मानें तो जिले में 5 हजार मरीज शिवपुरी से बाहर डेंगू रोग का इलाज करा रहे हैं। डेंगू से दो बच्चियों सहित सात की मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका उदासीन बनी हुई है। जिन घरों में मौत हुई है वहीं डेंगू के लार्वा की जांच नहीं की गई इससे समझ जा सकता है कि डेंगू रोग के प्रति प्रशासन कितना सजग है। नगर पालिका अध्यक्ष के वार्ड में ही टॉवर वाली लाइन में महीनों से झाड़ू नहीं लगी है और नालियां मलबे से पटी पड़ी हैं जिससे पूरे इलाके में मच्छरों का प्रकोप बना हुआ है। नपाध्यक्ष के वार्ड की यह स्थिति है तो पूरे शहर के हालात कितने विस्फोटक होंगे यह आसानी से समझा जा सकता है। डेंगू के कहर के कारण पैथोलॉजियों पर जांच हेतु लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हुई हैं। डेंगू का भय और कहर इसकदर व्याप्त है कि आचार संहिता में भी अभिभाषकों और कांग्रेस को सड़क पर आना पड़ा। अभिभाषकों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर साफ-साफ कहा कि जब वकीलों का धैर्य समाप्त होता है तब वह सड़क पर आते हैं और शिवपुरी में ऐसी ही स्थिति निर्मित हो गई है। 
शिवपुरी में नागरिकों और मरीजों का जिला अस्पताल से भरोसा उठ गया है। पहले अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का रोना रोया जाता था, लेकिन अब अस्पताल में डॉक्टर तो आ गए हैं, लेकिन आरोप है कि उनका रूझान मरीजों के उपचार के प्रति नहीं रहता और जिला अस्पताल  महज रैफरल सेंटर बन गया है। यही कारण है कि डेंगू के अधिकांश मरीज प्रायवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। तीन दिन पहले अभिभाषक हेमंत कटारे की 12 वर्षीय सुपुत्री अनुष्का की मौत का मामला अभी थमा ही नहीं था कि कल इंद्रा कॉलोनी में रहने वाली रामदयाल धानुक की 11 वर्षीय पुत्री मुस्कान की डेंगू ने जान ले ली। तीन दिन में एक के बाद एक दो मासूमों की मौत से शहरवासी डेंगू से भयभीत नजर आ रहे हैं। अभी तक डेंगू के प्रकोप के चलते सात मौतें हो चुकी हैं। जिन घरों में मौतें हुईं हैं उन घरों तक लार्वा की जांच हेतु स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंचीं हैं इससे पता चलता है कि अन्य स्थानों पर वे टीमें क्या पहुंची होंगी। 11 वर्षीय मुस्कान को बीते दो दिनों से बुखार आ रहा था जिसका उसके परिजन शहर के प्रायवेट अस्पताल में इलाज करा रहे थे। मुस्कान की प्लेट्लेट्स लगातार कम हो रही थी। स्थिति बिगड़ते देखकर परिजनों ने मुस्कान को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान  उसकी मौत हो गई।
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