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डॉ. गोविंद सिंह के निलंबन के बाद अब सिविल सर्जन के लिए शुरू हुई उठापटक

शिवपुरी। सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोविन्द सिंह का एक विवादास्पद वीडियो वायरल होने के बाद उन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो गया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शासन ने उन्हें निलंबित कर संयुक्त संचालक स्वास्थ्य कार्यालय में अटैच कर दिया है। डॉ. गोविन्द सिंह के निलंबित होने के बाद जिला अस्पताल का सिविल सर्जन पद रिक्त हो गया है और इस पद पर शासन ने अभी किसी की नियुक्ति नहीं की है। परंतु जिला अस्पताल के डॉक्टरों में पद के लिए उठापटक शुरू हो गई है। 
सिविल सर्जन डॉ. गोविन्द सिंह के निलंबन के बाद इस पद को हथियाने के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों में प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार पूर्व जिला एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा वर्तमान में जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. सागर सिविल सर्जन बनने के लिए सक्रिय हो गए हैं। टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके जैन वरिष्ठता के आधार पर इस पद के दावेदार हैं और उनकी सक्रियता भी देखी जा रही है। इसके अलावा जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. पीके खरे भी सिविल सर्जन की दौड़ में है। देखना यह है कि इनमें से किसी एक की नियुक्ति सिविल सर्जन के पद पर होती है अथवा राज्य शासन किसी अन्य अधिकारी को सिविल सर्जन बनाएगी। 
उल्लेखनीय है कि सिविल सर्जन डॉ. गोविन्द सिंह आयुष्मान भारत योजना के शुभारंभ के समय जब अपने कार्यालय में कुछ नजदीकी लोगों से बातचीत कर रहे थे तो बताया जाता कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ गाली गलौच की भाषा में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्हें एससी एसटी एक्ट में किए गए संशोधन पर आपत्ति थी और मुखर रूप से वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। वीडियो में डॉ. गोविन्द सिंह यह कहते हुए सुने गए कि मैं किसी पार्टी का जरखरीद गुलाम नहीं हूं। आरएसएस की शाखा में मुझे कोई ऊंगली पकड़कर नहीं ले गया मैं स्वयं अपनी इच्छा से सात साल की उम्र में गया। डॉ. गोविन्द सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ भी टिप्पणी करते सुने गए, लेकिन उनके कथित शुभचिंतक ने उस पूरी बात की वीडियो रिकॉर्डिंग की और उस वीडियो रिकॉर्डिंग को कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता जेपी धनौपिया को भेजा और श्री धनौपिया ने मुख्य चुनाव आयुक्त कांताराव को डॉ. गोविन्द सिंह की शिकायत की। चुनाव आयुक्त ने सीडी सहित शिकायत कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती शिल्पा गुप्ता को भेजी और जिला प्रशासन ने सीडी सुनने के बाद डॉ. गोविन्द सिंह के खिलाफ सामाजिक विद्वेष फैलाने का मामला भादवि की धारा 153ए और 188 के तहत दर्ज कराया। मामला दर्ज होने के बाद शासन ने डॉ. गोविन्द सिंह को निलंबित कर दिया। 
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