
ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा ग्वालियर चंबल संभाग में एक भी वैश्य उम्मीदवार को टिकिट नहीं दिया है। जिससे वैश्य समाज की भाजपा के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। वैश्यों की पार्टी कहलानी बाली बीजेपी ने ग्वालियर-चम्बल संभाग से वैश्य उम्मीदवारों का लगभग सफाया कर दिया है।
बमौरी से पूर्व मत्री केएल अग्रवाल और कोलारस से देवेन्द्र जैन टिकिट की मांग कर रहे थे। पार्टी ने दोनों को ही नकार दिया। अब यहां सवाल उठ रहे हैं कि क्या वैश्यों ने ही वैश्य समाज की काट की है और स्वयं के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। भविष्य में इनका उपयोग केवल चंदे की राजनीति के लिए होगा? इन सबके बावजूद समाज में कोई हलचल नहीं, अब क्या करेगा वैश्य समाज, पहले की तरह चन्दा देती रहेगी या अपने वजूद के लिए अन्य समाजों की तरह लड़ेगी। हालांकि केएल अग्रवाल ने इसके विरोध स्वरूप लगभग अपने पांच हजार समर्थकों के साथ निर्दलीय नामांकन पत्र भरकर मैदान में कूद गए हैं, वहीं देवेन्द्र जैन शांत होकर बैठ गए। कयास लगाए जा रहे हैं कि धीरे-धीरे वैश्य समाज में भाजपा के इस रुख के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है कहीं भाजपा को ग्वालियर-चंबल संभाग में इसके बड़े परिणाम भुगतने पड़े तो आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि वैश्य समाज का भी अपना एक बड़ा वोट बैंक है और वह किसी का भी ताजो तख्ता पलटने में समक्ष है। आगे क्या होगा तो यह आने वाले चुनाव परिणामों के बाद पता चलेगा।






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