शिवपुरी। पिता को जन्म से आयकर विभाग की प्रेक्टिस करते देखा और लॉ के फायनल ईयर में तय कर लिया कि अब सिविल जज ही बनना है,बस तैयारी शुरु की और तीसरे अटेंप्ट में सफलता अर्पित जैन को मिल ही गई। वहीं ताऊ के साथ एक साल की लगातार प्रेक्टिस ने दिव्यांश को इतना अनुभवी बना दिया कि वह भी सिविल जज की परीक्षा में सफल हो गए।
शहर के महल कॉलोनी में रहने वाले आयकर एडवोकेट पवन जैन के पुत्र अर्पित जैन ने बताया कि जब वह लॉ की पढाई कर रहे थे तब तय कर लिया कि जज ही बनना है और इसके लिए उन्हें जुनूनी बनना पड़ा और सारी सुध बुध छोड़कर प्रतिदिन 8 घंटे की पढाई की और नतीजा आपके सामने है।अर्पित ने 13 वी रैंक हासिल की है और उसे 297.5 अंक हासिल हुए। उनका कहना था कि सिविल जज बनने के पीछे प्रोफेशन में 100 फीसदी ऑनेस्टी होना तथा कानून की जानकारी बार-बार रिवाइज करना लक्ष्य रहा इसीलिए हमें यह सफलता मिली। उड़ीसा से लॉ किया और तीसरे चांस में वह सफलता अर्जित कर सके।
जज बनना है तो पहले प्रैक्टिस करें -दिव्यांश
सिविल जज में 26 वी रेंक के साथ चुने गए एडवोकेट गिरीश गुप्ता के भतीजे और ठेकेदार सुरेश चंद गुप्ता के बेटे दिव्यांश का कहना है कि यदि किसी को सिविल जज बनना है तो पहले प्रेक्टिस करें।ताकि सफलता 100 फीसदी मिले। इससे न केवल निर्भयता आती है वरन आपका कांफीडेंस लेवल भी बढ़ता है। इसलिए दिसंबर 17 से दिसंबर 18 के बीच की गई ताऊजी के साथ प्रेक्टिस ने मुझे सिविल जज के पद तक पहुंचाया। दिव्यांश ने अहमदाबाद से लॉ किया है।






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