
शहर के प्रथम नागरिक बीपीएल कांड में फस चुके है पहले
शहर में अगर बीपीएल के राशनकार्ड बनते है तो लीगल जो राशनकार्ड बनने चाहिए वो न के बराबर बनते हैं। ऐसा मामला नगरपालिका में हो चुका हैं ये सब हम अपने आप से नही बोल रहे हैं। ये सब हुआ हैं और होता है इससे हम जनता और प्रशासन को रूबरू कर रहे है। गरीब बेशहारा लोगो को जहाँ शासन की योजनाएं का लाभ लेना चाहिए वहाँ शिबपुरी की नगरपालिका में पैसे बाले लोग शासन की योजनायों का लाभ ले रहे हैं।गरीव लोगो का अगर सर्वे किआ जाए तो जितने गरीबी रेखा से नीचे बाले लोग जो सचमुच गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं उनके पास आपको बीपीएल राशनकार्ड नही मिलेगा पूरी तरह ओर जो लोग गरीबी रेखा से अपना जीवनयापन कर रहे हैं।उनके पास आपको बीपीएल राशनकार्ड मिलेगा। यहाँ तक तो सब ठीक है जब आप बताओ शहर के प्रथम नागरिक कहे जाने बाले नगरपालिका अध्यक्ष के पास भी बीपीएल कार्ड पाया गया था इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है। कि फिर कोन बचा ओर नगरपालिका में बीपीएल घोटाला भी हो चुका है।जिसमे बताया गया था कि एक राशनकार्ड बनबाने के 5000 रुपये बसूले जाते हैं। इस कारण बीपीएल राशनकार्ड बनना भी बंद हो गए थे और जांच भी बैठी थी। कुछ लोग इस मामले में आये भी थे।
यहाँ पर सवाल ये उठता है कि गरीब लोगों को यही कस्ट उठाने पड़ेंगे या बदलेगा तरीका जिसको जरूरत हैं उसको मिलेगा लाभ या नही???????






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